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अवसाद

Dसिर्फ उदास या दुखी रहना ही अवसाद नहीं है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य का मसला है, जो आपके जीवन में उलझन पैदा करने वाले कई कारणों से और बढ़ सकता है। 

इसे उदासी से इस प्रकार अलग मान सकते हैं कि अवसाद जब कम से कम दो सप्ताह तक जारी रहता है तो इसके बाद की स्थिति खिन्नाता से संक्षिप्त मुकाबला करने जैसी है। अवसाद की गंभीरता इस तथ्य में शामिल है कि यह आपके काम करने की सरल जड़ता या सामान्य शब्दों में कहा जाए तो आपकी क्रियाशीलता छीन लेता है।  
अवसाद को समझें
आप अकेले नहीं हैं। ऐसे अन्य लोग हैं, जिनके पास ऐसे ही सवाल, चिंताएं और संदेह हैं।सहायता ढूंढें

अवसाद के प्रकार

अवसाद से प्रभावित 25% लोग इसके लिए परामर्श नहीं लेते और चुपचाप इसकी पीड़ा झेलते रहते हैं। बहुत सार-संभाल, प्यार और प्रियजन की ओर से समझदारी भरे बर्ताव के साथ ही मनोचिकित्सा एवं चिकित्सकीय देखभाल आपका बचाव करते हुए जीवन की मुख्यधारा से जोड़ता है। यह चरण तीव्र और पीड़ादायक हो सकता है, लेकिन उबरना असंभव नहीं है। सहायता मौजूद है और थोड़े से ही प्रयास से आप अपने जीवन से अवसाद को बाहर निकाल सकते हैं।

इसके इलाज के लिए पहला कदम है, जिस तरह के अवसाद से आप गुजर रहे हैं उसका प्रकार पहचानना। अवसाद विकार के तीन मुख्य प्रकार हैं।
Major Depressive Disorder

मुख्य अवसाद विकार

एकध्रुवीय या प्रमुख अवसाद वह होता है, जिसके अंतर्गत आप अवसाद के पांच या इससे अधिक जटिल लक्षणों से ग्रसित पाये जाते हैं। इस स्थिति में कार्य करने, सोने, अध्ययन करने, खाने और सामान्य रूप में जीवन के अनुभव जुड़े हैं।
Treatment Resistant Depression

उपचार प्रतिरोधी अवसाद

यह अवस्था चिरस्थाई या दीर्घकालिक हो सकती है और इसमें अवसादरोधी दवा काम नहीं करती। इसमें स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अक्सर इलेक्ट्रोकॉन्वल्सिव थेरेपी दी जाती है।
Dysthymia

चिरकालिक अवसाद विकार

इस लक्षण के  तहत आप गंभीर अवसाद से जुड़े मामलों के साथ ही अवसाद के अन्य दो लक्षणों से कम से कम दो वर्षों के दौरान ग्रसित होंगे। इसे डायस्थिमिया के रूप में भी जाना जाता है, इस दीर्घकालिक अवस्था में आपके कार्य करने की क्षमता बाधित होती है।
अवसाद को बेहतर रूप में समझेंअवसाद क्या है?

अवसाद के अन्य प्रकार

Bipolar

उन्मादी अवसाद विकार

द्विध्रुवीय अवसाद में आपकी मन:स्थिति उन्माद एवं चरम मनोदशा के बीच झूलती रहती है। इसके लक्षणों में शामिल हैं - जरूरत से ज्यादा आत्मसम्मान से भरा होना, अनिद्रा, बहुत ज्यादा बोलना, विचारों का तेजी से आना-जाना , ध्यान भंग होना, लक्ष्य-निर्देशित गतिविधि बढ़ना या शारीरिक बेचैनी और बेहद दर्दनाक गतिविधियों में अत्यधिक भागीदारी शामिल है।
Secondary Depression

द्वितीयक अवसाद

क्या आप हाईपोथायरोयडिजम, स्ट्रोक, पार्किसन्स रोग, एड्स या किसी मनोरोग जैसे सिजोफ्रेनिया, बुलिमिया या गंभीर विकार या समस्या से पीड़ित हैं या इससे उबर रहे हैं। इन बीमारियों के दौरान भावनात्मक और शारीरिक दबाव आपको अधिक अवसाद के लिए ग्रहणशील बनाता है।
Psychotic Depression

मनोरोग कारक अवसाद

डरें नहीं,  अगर आपको मनोविकृति जैसे किसी प्रकार का भ्रम (झूठी मान्यताओं), वहम (देखकर या ऐसी चीजें जो हैं ही नहीं, लेकिन आपको दिखाई या सुनाई दे रही हैं) या मानसिक उन्माद (गलत तरीके से विश्वास करना कि दूसरे आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं) आदि के साथ गंभीर अवसाद का सामना कर रहे हैं। यह उचित उपचार और समय के साथ इलाज से पूरी तरह से ठीक हो जाती है।
Postpartum Depression

प्रसवोत्तर अवसाद

जन्म देने के बाद ज्यादातर महिलाओं द्वारा यह अनुभव किया जाता है, अवसाद का यह रूप सामान्य "बेबी ब्लूज" से अलग होता है। एक नवजात शिशु की जिम्मेदारी के साथ बड़े पैमाने पर हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन मिलकर कुछ माताओं के लिए भारी हो सकते हैं। लगभग 10 से 15% महिलाएं प्रसवोत्तर अवसाद अनुभव करती हैं।
SIMD

एसएमआईडी

सब्सटेंस-इंड्यूस्ड मूड डिसऑर्डर, यह निश्चित है कि कुछ दवाओं में आपके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करने की क्षमता होती है। इन दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों के कारण उन्माद या चिरकालिक अवसाद हो सकता है।
Seasonal Depression

मौसमी अवसाद

सर्दी के दौरान प्राकृतिक सूरज की रोशनी की कमी के कारण इस अवसाद का अनुभव किया जाता है, यह आम तौर पर वसंत या गर्मियों के शुरू होने पर देखा जाता है। यदि आपको ऐसे लक्षणों से गुजरना पड़ता है, तो अवसादरोधी दवाओँ और मनोचिकित्सा के जरिए निराशा से उबरने में मदद मिलेगी।
Masked Depression

अप्रत्यक्ष अवसाद

अवसाद का यह रूप अक्सर शारीरिक बीमारियों से छिपा हुआ रहता है, जिसके लिए कोई जैविक कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता है।

अवसाद के लक्षण

अवसाद के लक्षणों की गंभीरता, आवृत्ति और सीमा व्यक्तिगत और उनकी स्थिति के आधार पर अलग-अलग होती है। हालांकि अवसाद विकारों से पीड़ित किन्हीं भी दो व्यक्तियों में समान लक्षणों का अनुभव नहीं होता है, नीचे लिखे लक्षण इसकी शीघ्र पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
  • गंभीर विचलन, किसी बात को याद करने और निर्णय लेने में परेशानी
  • अनिद्रा, सुबह तक जागना या अत्यधिक नींद
  • अपराध की भावना, अयोग्यता और / या असहाय होने की भावनाएं
  • निराश रहना और/या निराशावाद की भावनाएं
  • जरूरत से ज्यादा खाना / वजन बढ़ना और भूख की परेशानी/ वजन घटना
  • थकान और ऊर्जा में कमी
  • सेक्स सहित सुखद गतिविधियों या शौक में पहले के मुकाबले कमी आना
  • जीवन में आनंद की कमी
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी
  • लगातार दर्द या पीड़ा, सिरदर्द, ऐंठन या पाचन संबंधी समस्याएं
  • लगातार उदास, चिंतित रहना या "खालीपन" की भावनाएं
  • आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयासों के विचार आना

अवसाद के कारण

जब अवसाद के कारणों की बात की जाती है, तो वास्तव में जो मायने रखता है, वह यह समझना और स्वीकार करना है कि अवसाद एक ऐसी स्थिति है जो किसी विशेष कारण के सिद्धांत का पालन नहीं करती है - आनुवंशिक संबंध की संवेदनशीलता किसी व्यक्ति  को प्रभावित कर भी सकती है या नहीं भी कर सकती है।

अवसाद विकार,  जैव-मनो-सामाजिक मॉडल एवं अन्य कुछ कारकों के संयोजन के कारण होता है।
स्वास्थ्य की स्थिति

कैंसर, थायराइड के मामले, दीर्घकालिक दर्द, स्ट्रोक, दिल का दौरा, पार्किंसंस रोग, संवाहिनी रोग, अल्जाइमर रोग, मैनोकार्डियल बीमारियां, मधुमेह, हिप फ्रैक्चर और हार्मोनल विकारों के साथ संवेदनाओं जैसे चिकित्सा की स्थिति अवसादग्रस्त बीमारी का कारण बन सकती है। इससे व्यक्ति  अपनी शारीरिक और मानसिक जरूरतों के प्रति उदासीन बन जाता है जिस कारण बीमारी ठीक होने में लंबा समय लग जाता है। 

जैविक

इसमें विभिन्न तंत्रिका संचारों के लिए जिम्मेदार नोरपाइनेफ्राइन, डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन प्रभावित होते हैं। अवसादग्रस्त लोगों की मस्तिष्क छवियों में हिप्पोकैम्पल वॉल्यूम सहित ऑर्बिटोफ्रन्टल कॉर्टेक्स, पुटामैन और थैलेमस में कमी पाए जाने जैसे संरचनात्मक अंतर पाये गए हैं;  हालांकि, क्या इन अंतरों की वजह से अवसादग्रस्तता विकार पैदा होता है या मनुष्यों में चिरकालिक तनाव के लिए अंत:स्रावी तंत्र में बदलाव जिम्मेदार है, इस बारे में परिणाम अभी भी अनिर्णायक हैं।  फिर भी, कई स्वास्थ्य समस्याओं को अवसाद के कारणों के रूप में माना जाता है।

मनोवैज्ञानिक

कम आत्मसम्मान, तनाव से भरे रहने की प्रवृत्ति और व्यक्तित्व विकार कुछ ऐसे मनोवैज्ञानिक कारण हैं, जो अवसाद के कारक होते हैं। हालांकि ये प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं और अवसाद के पूर्व की मनोवृत्ति नहीं हो सकते हैं।

सामाजिक

जीवन में प्रतिकूल परिवर्तन, उम्र (पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग), लिंग, पारिवारिक समस्याएं, बच्चे, विवाह, तलाक, बीमार रिश्तेदार, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पिछला सदमा या दुर्व्यवहार, भेदभाव, अलगाव, रिश्तों में कठिनाईयां, कार्यस्थल या विद्यालय में तनाव आदि कुछ सामाजिक कारण हैं, जिन्हें अवसाद में योगदान के लिए जाना जाता है। यहां तक कि जीवन में सकारात्मक घटनाएं, जैसे नौकरी में बदलाव भी अवसाद में बढ़ोत्तरी कर सकती हैं।

लिंग

महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अवसादग्रस्त होने की प्रवृत्ति कम पाई जाती है, क्योंकि महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति जैसे हार्मोनल परिवर्तनों के दौर से गुजरना पड़ता है।

उम्र

हालांकि बच्चों, किशोरों और किशोरवय उम्र को अवसादग्रस्त होने के लिए जाना जाता है, यह बाद की पीढ़ी है, जो उच्च जोखिम वाली है।

आनुवंशिकी

अवसादग्रस्तता के लगभग 30-40% लक्षण आनुवांशिक पूर्व मनोवृत्ति के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि घर, कार्यस्थली या विद्यालय में तनाव जैसे अतिरिक्त  तत्व भी अवसाद बढ़ाते हैं।

सदमा और गहरा दु:ख

शारीरिक या भावनात्मक प्रताड़ना और किसी मित्र या प्रियजन की मृत्यु अक्सर अवसाद में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। अत्यधिक दु:ख और शारीरिक अतिसंवेदनशीलता जैसी स्थिति अवसाद का कारण बनती है।

चिकित्सा और दवाईयां

निर्धारित ड्रग्स, अल्कोहल या मादक द्रव्यों का सेवन एक व्यक्ति  को अवसाद के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है। इसके अलावा, कुछ दवाईयां यदि निर्धारित ड्रग्स के साथ ली जाती हैं, तो यह इसके प्रभाव में बाधा डाल सकती हैं, जो बाद में अवसाद के लक्षणों को बढ़ा सकती है। जब ऐसी आदत लग जाए तो 'सावधान" शब्द की सख्त जरूरत है। 

Health Conditions
Biological
Psychological
Social
Gender
Age
Genetics
Grief
Medication

निदान और उपचार

अवसाद से उबरने के लिए इलाज प्रक्रिया में तेजी लाना महत्वपूर्ण है। अक्सर गलत दवाएं और परामर्श अवसाद का सामना कर रहे व्यक्ति  को और अधिक अवसाद की स्थिति और प्रतिकूल परिस्थितियों में धकेल देता है। इलाज शुरू करने का सही तरीका यह है कि एक पेशेवर चिकित्सक और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता प्राप्त कर इसकी शुरुआत की जाए। जांच के दौरान आप मेंजिस तरह के अवसाद का पता चला है, उस अवसाद के प्रकार और स्थिति के आधार पर उपचार शुरू किया जाएगा। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि अपने परामर्शदाता के साथ 'टॉक थेरेपी' में खुद को शामिल करना, उपचार प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो उसे आपके भावनात्मक प्रतिरोध की जानकारी में सहयोग करेगा।

अवसादग्रस्त व्यक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है:
  • दवाईयां देकर
  • ट्रायसाइक्लिक्स (पुरानी अवसादरोधी दवाओं से)
  • मोनोमाइन ऑक्सीडेज इनहिबिटर (एमओओआईएस)
  • अवसादरोधी
  • मनोचिकित्सा
  • पारस्परिक उपचार
  • साइकोडाइनेमिक थेरेपी
  • संज्ञान संबंधी व्यवहारवादी उपचार
  • इलेक्ट्रोकोनवल्सिव थेरेपी (ईसीटी)
  • वैगस तंत्रिका उत्तेजना (वीएनएस)
  • रिपीटेटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (आरटीएमएस)

खुद का मूल्यांकन करें

हम में से ज्यादातर कभी-कभी उदास, निराश, या निरुत्साहित महसूस करते हैं; लेकिन कुछ लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रहती। यदि आप लगातार इस तरह से महसूस कर रहे हैं - और यह आपके दैनिक जीवन के बीच आता है - इसका मतलब हो सकता है कि आप अवसाद का सामना कर रहे हों।

इस समय यह परीक्षण करना आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन करने का एक अच्छा तरीका है। इससे यह पहचानने में मदद मिल सकती है कि क्या आप में अवसाद के कुछ चेतावनी भरे संकेत नजर आ रहे हैं, और सही तरीके से आपकी मदद कैसे की जानी चाहिए।

अवसाद किन चीजों से बढ़ सकता है

ज्यादातर बार ऐसा नहीं होता कि अवसाद और अन्य बीमारियां आपस में जुड़ी हों। इसका अर्थ है कि शारीरिक बीमारी, नैदानिक अवसाद की ओर ले जा सकती है या इसके विपरीत हो सकता है। यह एक सामान्य बात है जब एक गंभीर शारीरिक बीमारी के कारण निराशा उत्पन्ना होती है, लेकिन अगर यह स्थिति दो सप्ताह बाद भी जारी रहती है, तो यह ध्यान दिये जाने का समय है।

अवसाद की सह-मौजूदा आम स्थितियां यह हैं:

दुष्चिंता संबंधी बीमारियां

घबराहट संबंधी कुछ विकारों में आकस्मिक भय विकार, सनक से भरा बाध्यकारी विकार, गहरे आघात के बाद का तनाव विकार, सामाजिक भय या सामान्य दुष्चिंता विकार शामिल हैं, जिन्हें अवसाद के साथ सहवर्ती के रूप में जाना जाता है।

दिल के रोग

दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों में से 18-26% और स्ट्रोक के 30-50% रोगी अवसाद का अनुभव कर सकते हैं। दिल की बीमारियों की बात की जाए तो तनाव, गरीब जीवन शैली विकल्प और खुद की देखभाल करने की अनिच्छा जैसे मामले अवसाद के विकारों में योगदान करते हैं।

कैंसर

कैंसर के रोगियों में अवसाद विकार पाए जाते हैं, जब यह दैनिक गतिविधियांे की क्षमता को सीधे प्रभावित करता है, सामाजिक संबंधों को बाधित करता है, और अत्यधिक दर्द या थकान का कारण बनता है

मधुमेह

अवसाद और मधुमेह का चक्र एक साथ चलता है, जिस पर सही समय पर ध्यान नहीं दिए जाने से अधिक नुकसान हो सकता है। मधुमेह आंतरिक अशांति का कारण बनता है, जिससे हताशा शुरू हो जाती है, जिसके कारण रक्त  में शर्करा उच्च स्तर हो जाना, अधिक थकान, सुस्ती, खराब मनोदशा और यहां तक कि आगे की स्थिति में अवसाद भी हो सकता है।

एचआईवी / एड्स

एचआईवी / एड्स से जुड़ा कलंक किसी व्यक्ति  को अवसाद में ले जा सकता है। अक्सर दोहरे अपमान से बचाव के रूप में लोग मादक द्रव्यों का सेवन  करने लगते हैं, जिससे उनकी हालत और बिगड़ जाती है। नए और बेहतर उपचार यह सुनिश्चित करते हैं कि व्यक्ति  को एक अच्छी और स्वस्थ जीवन शैली जीने का मौका मिला।

थायरॉइड

अक्सर चिंता, शारीरिक और मानसिक सुस्ती थायरॉइड बढ़ने और थायरॉइड घटने (हाइपरथायरॉयडिज्म और हाइपोथायरॉयडिज्म) से जुड़ी होती है। इसलिए, इससे जुड़े अवसाद विकार का अतिरिक्त  निदान प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, ताकि इलाज दिया जा सके।

यौन रोग

निदान से पूर्व अवसाद की स्थिति यौन क्रियाओं सहित जीवन में अधिकतर चीजों के प्रति उदासीन बना सकती है, जबकि बेडरूम में अच्छा साबित होने में असमर्थता किसी के आत्मविश्वास के स्तर को डिगा देती है, जो अवसाद का कारण बनता है।

पाचन संबंधी विकार

अव्यवस्थित आहारचर्या, तनाव हार्मोन और पाचन एसिड्स के ज्यादा स्रावित होने के कारण अवसाद के दौरान पाचन समस्याएं हो सकती हैं। दूसरी ओर, सूजन आंत्र रोग (आईबीडी), क्रोहन की बीमारी और अल्सरेटिव कोलाइटिस भी अवसाद पैदा कर सकता है।

मादक पदार्थों का व्यसन

मानसिक बीमारी, मादक द्रव्यों के सेवन की ओर ले जा सकती है या इसके विपरीत हो सकता है। अवसाद से निपटने के लिए साधन के रूप में शांतिदायक दवा, अल्कोहल और अन्य पदार्थ लेने से गंभीर नशे की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

मैं अपनी मदद कैसे कर सकता हूं

यह समझते हुए कि अवसाद ऐसा नहीं है, जिससे एकदम से बाहर नहीं निकला जा सकता हो। अक्सर आप अपने जीवन के बारे में थके, असहाय और निराश महसूस करेंगे। पूर्व की तरह चीजों को पसंद करना या किसी से बातचीत की इच्छा प्राप्त करना लगभग असंभव सा प्रतीत होगा। अवसाद से बाहर निकलना एक विकल्प नहीं है, इसलिए आपको खुश रहने के लिए छोटे कदमों से शुरू करना होगा और फिर बड़े लक्ष्यों के लिए प्रयास करना चाहिए।
Take professional help
जितनी जल्दी हो सके पेशेवर सहायता प्राप्त करने का प्रयास करें
Avoid negative influences
नकारात्मक प्रभावों से बचें
Exercise
सक्रिय रहने की कोशिश करें - व्यायाम करना, फिल्म देखने जाना, खेल या कोई अन्य गतिविधि करें, जिसका पूर्व में आपने आनंद लिया हो।
Mood
अपने मनोस्थिति को एकदम से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सुधारने की अपेक्षा करें।
Set realistic goals
Set realistic goals for yourself by breaking down large tasks into smaller ones.
Set some priorities
Set some priorities and do what you can.
Set some priorities
Spend time with other people even if it seems irritable, confide in a trusted friend or relative and try not to isolate yourself.
respond positively
When your sleep and appetite improve, respond positively to such developments.
Postpone important decisions
Postpone important decisions like getting married or divorced or changing jobs.
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मैं किसी और की मदद कैसे कर सकता हूँ

जब आप किसी पहचान वाले या नजदीकी के अवसादग्रस्त होने के बारे में जानते हैं तो तीन सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं जो आप उन्हें दे सकते हैं प्यार, सहारा और उचित पेशेवर से मदद की कोमलतापूर्ण लेकिन एक दृढ़ कोशिश करें।
  • भावनात्मक सहारा, समझ, धैर्य और प्रोत्साहन दिखाएं।
  • उनसे बात करें, उन्हें खुद को व्यक्त करने दें और ध्यान से सुनें।
  • उनकी भावनाओं को कभी आहत न करें या उनकी पीड़ा को कमतर न आंकें। 
  • कभी भी आत्महत्या संबंधी उनके संदर्भों को नजर अंदाज न करें। उनका इलाज कर रहे चिकित्सक को इस बारे में बताएं।
  • अपने प्रियजन से पैदल चलने के लिए, बाहर घूमने और जिन गतिविधियों में उन्हें आनंद आता है उनके लिए आमंत्रित करें। लेकिन अगर उनकी इच्छा नहीं है तो उन पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए।
  • यदि चिकित्सक से मिलने वह आपको साथ ले जाना चाहते हैं तो उनके साथ जाएं।
  • अपने प्रियजन को याद दिलाते रहें कि समय और परामर्श के साथ, उनका अवसाद दूर हो जाएगा।
  • अपने प्रियजन से कठोरता से पेश न आएं, इस बुरे समय में उनका सहारा बनें।
  • उन्हें हंसाएं और उन्हें जाहिर करें कि आप उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें उनकी ताकत की याद दिलाते रहें।
  • उन्हें पेशेवर सहायता लेने के लिए राजी करें।
  • यदि वह आत्महत्या की प्रवृत्ति, मतिभ्रम या भ्रांति का अनुभव कर रहे हैं तो अस्पताल में भर्ती के लिए उनकी व्यवस्था करें।
  • उस व्यक्ति को छोड़ें नहीं - उन्हें इस बात की जरूरत है कि उनके आसपास के कई लोग बार-बार उनसे कहते रहें कि वह बेहतर महसूस करने के लायक हैं।

FAQs

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अवसाद एक मानसिक बीमारी है?
हां, नैदानिक अवसाद एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य, चिकित्सा स्थिति है; यह व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है।
क्या अवसाद से पीड़ित हो चुके व्यक्ति को फिर से अवसाद जकड़ सकता है?
गंभीर अवसाद के प्रकरण का अनुभव करने वाले व्यक्ति को भविष्य में इसके होने का ज्यादा जोखिम रहता है। लेकिन अवसाद से उबर चुका हरेक व्यक्ति इसे फिर से अनुभव नहीं करेगा। पूरी तरह ठीक होने एवं भविष्य के अवसाद को रोकने या पहचानने में मदद के लिए सही उपचार प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
अवसाद विकार कितने लंबे समय तक रहता है?
यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो विभिन्न प्रकार के अवसाद विकार कुछ महीनों या कभी-कभी वर्षों तक रह सकते हैं। कई लक्षणों वाला अवसाद का एक बड़ा प्रकरण विशेष रूप से कुछ महीनों तक रहता है। मौसमी अवसाद, या एसएडी आमतौर पर पूरे सर्दियों के महीनों तक बढ़ता है और स्प्रिंग और ग्रीष्म के दौरान सुधरने लगता है। द्विध्रुवीय विकार को "अप" (उन्माद की अवधि) और "डाउन" (अतिवादी अवसाद का समय) के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि ये चरण तेजी से या धीरे-धीरे बदल सकते हैं, द्विध्रुवीय अवसाद जब तक प्रभावी इलाज नहीं मिल जाता है तब तक रह सकता है। डायस्थिमिया हल्का और पहचान करने में ज्यादा कठिन है और अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो कई वर्षों तक रह सकता है।
क्या अवसाद के लिए कोई पारंपरिक उपचार के विकल्प मिल सकते हैं, जिन्हें मैं इस्तेमाल कर सकता हूं?
वैकल्पिक चिकित्सा जो किसी भी उपचार या तकनीक का वर्णन करती है, वह किसी विशिष्ट स्थिति के लिए वैज्ञानिक रूप से लिखित या सुरक्षित नहीं है। वैकल्पिक चिकित्सा में विभिन्न प्रकार के विषयों को शामिल किया गया है जिसमें आहार और व्यायाम से लेकर मानसिक अनुकूलन और जीवन शैली में परिवर्तन शामिल हैं। वैकल्पिक चिकित्सा के उदाहरणों में योग, एक्यूपंक्चर, निर्देशित कल्पना, कायरोप्रैक्टिक देखभाल, सम्मोहन, बायो फीडबैक, अरोमाथेरेपी, विश्राम, हर्बल उपचार, मालिश और कई अन्य तरीके शामिल हैं। यदि आप इन विकल्पों में से किसी को भी इस्तेमाल करने में रुचि रखते हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें।
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