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आप अकेले नहीं हैं। ऐसे अन्य लोग हैं जिनके पास ऐसे ही सवाल, चिंताएं और संदेह हैं।थेरेपिस्ट ढूंढें
कलंक और समाज

कलंक और समाज

समाज द्वारा गलत माना जाने वाला कोई कार्य जिसके लिए लोगों की अस्वीकार्यता या शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है वह कलंक है। ये विशेषताएं नस्लीय या सांस्कृतिक पहचान, यौन पहचान, सामाजिक स्थिति, शारीरिक मौजूदगी, बीमारी या विकलांगता के मामले में हो सकती हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करने की दिशा में कुछ कदम

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करने की दिशा में कुछ कदम

कलंक को कम कर मानसिक रूप से पीड़ित कई अन्य लोगों की सहायता की जा सकती है, ताकि वे आसानी से अपनी समस्याओं के बारे में बात कर सकें। कलंक को कम करने के चरणों के बारे में यहां और जानें

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प्रतिमान विस्थापन: मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017

प्रतिमान विस्थापन: मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017

इस साल 7 जुलाई को, 2017 के मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम को लागू किया गया था। यह ऐतिहासिक कानूनी सिद्धांत अपने पूर्ववर्ती रूप से एक प्रतिमान विस्थापन है, क्योंकि यह मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करने और उन्हें अपराधी जैसा महसूस करवाने के बजाय, उनको स्वीकृति देने के साथ-साथ उपचार और देखभाल के वितरण के दौरान ऐसे अधिकार प्रदान करता है जिनके वे हकदार हैं।

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अपूर्णता से परे: आत्म-प्रेम का अभ्यास

अपूर्णता से परे: आत्म-प्रेम का अभ्यास

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद अधिक आम हो सकता है. सह-घटित कारक जैसे लिंग-आधारित भूमिकाएं, तनाव और जीवन के नकारात्मक अनुभव, अवसाद, उत्कंठा और सहरुग्णता की उच्च दर से संबंधित हैं. यह उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से सत्य है जो एक ही समय में विभिन्न भूमिकाएं निभाती हैं, क्योंकि उन्हें 'परिपूर्णता' के प्रयास के लिए अनुकूलित किया गया है. यह तनाव और परेशानी का कारण बनता है, जो मानसिक स्वास्थ्य सम्बंधित चिंताओं को जन्म देता है.

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नए विचारों के लिए प्रेरणा: क्या खानपान से जुड़ी बुरी आदतें आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं?

नए विचारों के लिए प्रेरणा: क्या खानपान से जुड़ी बुरी आदतें आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं?

पेट भरकर खाना खाने के बाद दोषी महसूस करना, वजन बढ़ जाने के डर से भोजन न करना, अतिरिक्त वजन को कम करने के लिए भूखा रहना और अपने शरीर को लेकर सचेत होना की प्रथा अब पहले से कहीं अधिक प्रचलित है। हम में से कई लोग आवश्यकता महसूस करते हैं कि उन्हें दुबला होना चाहिए और वजन कम करना चाहिए, मगर वज़न बढ़ जाने का नाजायज और निरंतर डर, विकृत शारीरिक छवि विकार का एक लक्षण हो सकता है।

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धौंस और युवा दिमाग पर इसका प्रभाव

धौंस और युवा दिमाग पर इसका प्रभाव

जुलाई 2016 में, एक 14 वर्षीय लड़का स्कूल से लौटा, अपने अपार्टमेंट ब्लॉक की छत पर गया, और कूद कर अपनी जान दे दी. जांच से पता चला कि स्कूल वैन में उसके साथ जाने वाला एक साथी उसे डराया-धमकाया करता था. एक अन्य घटना में, एक मेट्रो शहर के प्रतिष्ठित निजी स्कूल में पढ़ रहे कक्षा 9 के एक छात्र ने बताया की अपने सहपाठियों द्वारा उत्पीड़ित किये जाने के कारण वह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक आघात से गुजर रहा था. यह बात तब सामने आई जब एक साधारणत: मृदुभाषी और संस्कारी बच्चा हिंसक हो गया. धौंस जमाना और डरना-धमकना भारत में हर जगह मौजूद हैं, परन्तु फिर भी यह बेहद कम रिपोर्ट किया जाता हैं.

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आप कितनी अच्छी तरह से अपनी दोस्ती जानते हैं?

आप कितनी अच्छी तरह से अपनी दोस्ती जानते हैं?

हम में से अधिकांश अपने दोस्तों को अच्छी तरह से जानने का दावा करते हैं, और हमारे सबसे अच्छे दोस्त भी बेहतर हैं, लेकिन हम में से कितने लोग उनके साथ की 'दोस्ती' समझते हैं? क्या हम जानते हैं कि एक ही रिश्ते में कितने तरह की दोस्ती का अस्तित्व हो सकता है? क्या हम जानते हैं कि किसी व्यक्ति के साथ हमारी दोस्ती की प्रकृति हमारे मानसिक कल्याण को प्रभावित कर सकती है?

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आप कितनी अच्छी तरह से अपनी दोस्ती जानते हैं?

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य: ज्यादा जिम्मेदारियां, ज्यादा तनाव

तुम कौन हो? एक बेटी? एक माँ? एक पत्नी? एक गृहस्थ? एक कामकाजी महिला? एक दोस्त? एक बहन? इत्यादि। महिलाएं एक ही दिन में एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं। इन भूमिकाओं में से प्रत्येक भूमिका की सामाजिक संरचना और उसके चयन के कारण उन पर उम्मीदों का बोझ लदा होता है। क्या हमने कभी सोचा है कि इन भूमिकाओं से जुड़े दबाव और अपेक्षाएं उचित हैं?

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क्यों हम बुजुर्गों में अवसाद के लक्षणों की अनदेखी करते हैं

क्यों हम बुजुर्गों में अवसाद के लक्षणों की अनदेखी करते हैं

एक मज़बूत सामाजिक तानेबाने के बिना जैसे-जैसे हम एकल समाज की ओर बढ़ रहे हैं, अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 30 करोड़ से अधिक लोग अवसादग्रस्त हैं। अवसाद एक ऐसी मानसिक बीमारी है जो अलग-अलग लोगों और आयुवर्गों में अलग तरह से असर दिखाती है और सामने आती है।

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नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य

नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य

क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आप तनाव से कुछ राहत पाने के लिए दवाओं या शराब का उपयोग कर रहे हैं? क्या आपने कभी पाया है कि अपनी नियमित गतिविधियां पूरी करने के लिए आपको किसी प्रकार की दवा या शराब की उत्तेजना की आवश्यकता है? क्या वे लोग जिनके साथ आप ज्यादा समय बिताते हैं, वे आपको सुझाव देते हैं कि आप शराब या नशीली दवाओं का सेवन करना बंद कर दें?

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Men and Mental Health

पुरुष और मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य विकार बढ़ रहे हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में कम से कम 13.7% व्यक्ति अपने जीवनकाल में मानसिक बीमारी से पीड़ित होंगे। सामान्यतः महिलाओं में सामान्य मानसिक बीमारी (सीएमडी) से पीड़ित होने की संख्या पुरुषों की तुलना में दो गुना अधिक होती हैं। हालांकि इस विसंगति के पीछे के कुछ कारणों में हार्मोन और जीवविज्ञान शामिल हो सकता है, अन्य कारणों में हमारे चारों ओर का सांस्कृतिक वातावरण शामिल है।

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पुरुषों में अवसाद और चिंता

वर्ष 2015 में यह माना गया था कि विश्वभर में अवसाद से पीड़ित लोगों की संख्या 322 मिलियन है। भविष्य में इन आंकड़ों के बढ़ने की ही आशंका है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अवसाद और चिंता जैसे विकारों को पहचानने और सहायता लेने की स्थिति निम्न स्तरीय होने के कारण वैश्विक रूप से हर साल एक ट्रिलियन यूएस डॉलर का नुकसान होता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों के अवसाद के बारे में अक्सर कम ही पता चल पाता है।

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Stress during exams

दैनंदिन भाषा में सतर्कता और समानुभूति कैसे बरतें

अंग्रेज़ी में बातचीत करने का सबसे मज़ेदार पहलू यह है कि हमारी साधारण जिंदगी (एवं भाषाओं) से जुडे शब्द बहुत आसानी से सम्मिलित हो जाते हैं। इससे चलती भाषा का प्रचलन बढ़ जाता है, जिसका उपयोग हँसी-मज़ाक या छेड़खानी करने के लिए किया जाता है। क्योंकि हम सामाजिक जीव हैं, सबके साथ सामन्जस्य बनाकर चलना हमारी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है। ऐसे दलों का गठन करते समय हम उन लोगों को बाहर छोड़ देते हैं जिनकी योग्यता कमतर लगती है। इस कारणवश चिकित्सकीय / मनोविकार से जुड़े शब्दों का प्रयोग अपमानजनक लग सकता है। इसलिए, दूसरों से छेड़छाड़ करने या उनका मज़ाक उड़ाने के लिए हम किस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं इसे लेकर हमें सचेत रहना चाहिए।

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Stress during exams

परीक्षा के दौरान स्वयं की देखभाल

परीक्षा के दौरान व्यग्र महसूस कर रहे हो? परीक्षा सिर पर है और इस समय बेचैन और व्यग्र महसूस करना स्वाभाविक है।

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