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उत्कंठा क्या है?

उत्कंठा क्या है?

हर व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में थोड़ी-बहुत उत्कंठा से गुजरता है. इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे कि कोई महत्वपूर्ण परीक्षा, नई नौकरी, नए शहर में आगमन, अपने बच्चों की खबर लेना या पहली बार अपने साथी के माता-पिता के साथ मुलाकात. ऐसी स्थितियों में उत्कंठा का अनुभव स्वाभाविक है एवं कभी-कभी उत्कंठा उपयोगी भी साबित हो सकती है. यह हमें बेहतर प्रदर्शन करने और तनावपूर्ण तथा चिंता-ग्रस्त स्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद कर सकती है. हालांकि तनावपूर्ण स्थिति के गुजरने के बाद भी अगर उत्कंठा की भावना बनी रहे तो यह एक गहन मुद्दे का संकेत हो सकता है. यह उत्कंठा विकार हो सकता है|

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उत्कंठा क्या है?

प्रसवोत्तर अवसाद

प्रसवोत्तर अवसाद एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जो लगभग 20 प्रतिशत भारतीय माओं को उनके बच्चे के जन्म के बाद के 12 हफ़्तों के भीतर प्रभावित करता है. “प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण सामान्य अवसाद के समान होते हैं - जैसे चिड़चिड़ापन, मिजाज में परिवर्तन, रोना, अभिभूत होने की भावना, नींद की कमी और थकान. प्रसवोत्तर अवसाद की दिलचस्प बात यह है कि इसमें नवजात शिशु पर बहुत ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाता है और माँ के बच्चे को पोषित करने की क्षमता पर संदेह किया जाता है. मनोचिकित्सक डॉ एनी मैथ्यू कहती हैं, "यह बच्चे के साथ जुड़ने में कठिनाई या मातृत्व को अच्छी तरह से संभाल न पाने के अपराधबोध के रूप में उभर सकता है."

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उत्कंठा क्या है?

मनोविज्ञान में कैरियर

क्या आपके लिए मनोविज्ञान में कैरियर सही है? क्या कभी लोगों के व्यवहार ने आपमें उत्सुकता या जिज्ञासा पैदा की है? क्या आप एक अच्छे श्रोता या उत्सुक प्रेक्षक हैं या आप वास्तव में लोगों के व्यवहार के तरीकों के प्रति उत्सुक रहते हैं? अगर ऐसा है तो मनोविज्ञान में कैरियर आपको आकृष्ट कर सकता है. कुछ साल पहले पेशे के उपलब्ध विकल्प काफी सीमित थे. अब व्यवसायों में विविधता की काफी गुंजाइश है. निम्नलिखित मनोविज्ञान के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विषयों का विश्लेषण दिया गया है ताकि आप यह तय कर सकें कि मनोविज्ञान में कैरियर आपके लिए है या नहीं.

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मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करना

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करना

भारत में मानसिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से संबोधित किया जाये, इसके लिए मानसिक बिमारियों से जुड़े कलंक को कम करना जरुरी है. समाज में इससे जुड़े कलंक के कम होने से पीड़ितों को सहायता मांगने और अपनी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

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मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करना

मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना

मानसिक स्वास्थ्य, इसके विकारों और देश में उपलब्ध इसके उपचार के विभिन्न तरीकों के बारे में भारत के लोगों को सूचित करना और शिक्षित करना अनिवार्य है. इस स्तर पर इन कार्यक्रमों को निम्न चार स्तरों पर केंद्रित करना महत्वपूर्ण है

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महिलाओं से दुर्व्यवहार और उन्हें लगने वाला सदमा

महिलाओं से दुर्व्यवहार और उन्हें लगने वाला सदमा

कुछ लोग कह सकते हैं कि भारत में हाल ही में हुए यौन शोषण और बलात्कार के मामलों ने उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए छोड़ दिया है। हालांकि इस देश के नागरिकों के लिए न्याय की मांग करना और अपराधियों को कानून द्वारा दंडित देखना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि इन घटनाओं का उत्तरजीवी और उनके परिवार पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, हिंसा और दुरुपयोग के बाद इससे निपटने के लिए उन्हें पर्याप्त सहायता दिया जाना महत्वपूर्ण है।

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कार्य स्थल पर मानसिक स्वास्थ्य - नियोक्ता को इसके बारे में पता होना चाहिए

कार्य स्थल पर मानसिक स्वास्थ्य - नियोक्ता को इसके बारे में पता होना चाहिए

हाल के वर्षों में कर्मचारी स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण और उनके हितों को लेकर काफी सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी आधुनिक कार्य स्थल में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समझ और समर्थन की कमी है। डब्लू एच ओ के मुताबिक हम अपनी ज़िंदगी का एक तिहाई भाग कार्यस्थल में बिताते हैं। यह बेहद जरूरी है कि संगठन अपने कर्मचारियों के लिए कार्य वातावरण को बेहतर बनाने का प्रयास करे।

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क्या आपकी व्यस्त कार्यशैली मानसिक स्वास्थ्य की चिंता का कारण है?

क्या आपकी व्यस्त कार्यशैली मानसिक स्वास्थ्य की चिंता का कारण है?

मई 2019 तक, बर्नआउट को ग्यारहवें पुनरीक्षण में अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकृत रोगों की श्रेणी (आईसीडी-11) में वर्गीकृत किया गया है। हालांकि एक आधिकारिक चिकित्सा स्थिति के रूप में वर्गीकृत ना करते हुए इसे एक पेशेवर घटना के रूप में वर्गीकृत किया गया है। आगे बढ़ने से पहले, यह समझना महत्वपूर्ण है कि वास्तव में बर्नआउट क्या है। आई सी डी -11 इसे परिभाषित करता है "बर्नआउट क्रोनिक वर्कप्लेस तनाव से उत्पन्न एक लक्षण है, जिसे सफलतापूर्वक प्रबंधित नहीं किया गया है।"

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बर्नआउट के संकेत

बर्नआउटः पेशे से जुड़ी घटना

मई 2019 तक, बर्नआउट को ग्यारहवें पुनरीक्षण में अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकृत रोगों की श्रेणी (आईसीडी-11) में वर्गीकृत किया गया है। हालांकि एक आधिकारिक चिकित्सा स्थिति के रूप में वर्गीकृत ना करते हुए इसे एक पेशेवर घटना के रूप में वर्गीकृत किया गया है। आगे बढ़ने से पहले, यह समझना महत्वपूर्ण है कि वास्तव में बर्नआउट क्या है। आई सी डी -11 इसे परिभाषित करता है "बर्नआउट क्रोनिक वर्कप्लेस तनाव से उत्पन्न एक लक्षण है, जिसे सफलतापूर्वक प्रबंधित नहीं किया गया है।"

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बर्नआउट के संकेत

बर्नआउट के संकेत

अमेरिकन मनोवैज्ञानिक संगठन के अनुसार काम के कारण हुए बर्नआउट का अर्थ है "जब कोई व्यक्ति लम्बे समय तक थकावट और रुचि की कमी महसूस करता है और जिसके चलते उसके काम के प्रदर्शन में गिरावट होने लगती है." यह एक स्थायी तनाव की स्थिति है जिससे शारीरिक और भावनात्मक थकावट के साथ-साथ नकारात्मक भावनाएँ महसूस होती हैं, जैसे कि अप्रभावी होना, कुछ हासिल ना कर पाने का एहसास और निराशावाद।

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एक सचेत और समानुभूति रखने वाला दोस्त बनने के पाँच तरीके

एक सचेत और समानुभूति रखने वाला दोस्त बनने के पाँच तरीके

दोस्ती हमारे जीवन में समर्थन के सबसे अंतरंग स्रोतों में से एक है. हम इस रिश्ते को बहुत ज्यादा सहानुभूति और विश्वास के साथ बनाते और पोषित करते हैं. यह रिश्ता हमारी सामाजिक और भावनात्मक दक्षताओं को बेहतर कर सकता है जिससे हमारा आत्मविश्वास और मानसिक कल्याण बढ़ता है|

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कार्यस्थल पर मानसिक बीमारी के बारे में बात करना

कार्यस्थल पर मानसिक बीमारी के बारे में बात करना

वयस्कता के दौरान कार्यकारी जीवन की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह जीवन-यापन के कई मूलभूत जरूरतों को पूरा करता है, जैसे कि - भोजन, आर्थिक सुरक्षा और आश्रय। यह एक ऐसी जगह होती है जहां हम पारस्परिक संबंध बनाते हैं, अपनेपन और प्रभावशीलता की भावना को विकसित करते हैं। ज्यादातर वयस्क कार्यस्थल पर ही अपना अधिकांश समय बिताते हैं और यही वजह है कि इसका उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।

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महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि 2020 तक 20% भारतीय किसी न किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित होंगे (स्रोत)। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मानसिक बीमारी से प्रभावित होने की संभावना 25% ज्यादा होती है। यह अवसाद और उत्कंठा जैसे सामान्य मानसिक विकारों के लिए विशेष रूप से सत्य है। यह मामले महिलाओं में होने वाले हार्मोनल असंतुलन से और बढ़ जाते हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों से बात करना

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों से बात करना

मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे किसी अपने से बातचीत करना पेचीदा हो सकता है. उनकी सहायता प्रणाली का एक हिस्सा होने के नाते, आपके लिए यह जरुरी है कि आप अपने प्रियजन के साथ सम्मान और सहानुभूति के साथ व्यवहार करें. अवसाद, उत्कंठा या किसी अन्य मानसिक विकार से पीड़ित ज्यादातर लोग अक्सर अकेलेपन या अलगाव की भावनाओं से गुजरते हैं. इसलिए आपका साथ आपकी सहानुभूति और आपका उनके प्रति कोई धारणा न बनाना उन्हें इस मुश्किल का सामना करने में और तेजी से ठीक होने में एक जरुरी भूमिका निभाता है.

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बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए आसान सा संकल्प लेना!

बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए आसान सा संकल्प लेना!

दुनिया भर के लोगों में हर साल के आखिर में एक आम प्रथा देखी जाती है। वह है नए साल के लक्ष्य निर्धारित करना। कुछ लोगों के लिए यह आसान हो सकता है, लेकिन कई लोगों के लिए संकल्प निर्धारित करने का विचार ही अपनेआप में तनावपूर्ण हो सकता है। जो लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए नव वर्ष का आगमन अक्सर परेशानी भरा होता है। एक ओर जहां अन्य लोग वर्ष के अंत का जश्न मनाते हैं और अपने संकल्पों को लेकर उत्सुकता से बातचीत करते हैं, वहीं मानसिक बीमारी वाले लोगों के लिए, नए साल के संकल्प स्वयं निर्धारित करना एक कठिन काम हो सकता है।

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शराब और ड्रग्स को लेकर किशोरों में प्रयोग करने की प्रवृत्ति

शराब और ड्रग्स को लेकर किशोरों में प्रयोग करने की प्रवृत्ति

किशोरों का शराब और ड्रग्स के प्रति हमेशा से एक आकर्षण रहा है. विशेष रूप से पिछले पचास वर्षों में इन पदार्थों के सेवन को "कूल" होने के साथ जोड़ा जाने लगा है और किशोरों के लिए हाईस्कूल में 'कूल' होना मान्यता प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जाता है जो उन्हें लोकप्रिय बनाता है. इससे पहली बार शराब का सेवन करने की औसत उम्र कम हो गई है. शुरुआती उम्र में ही शराब के सेवन से किशोरों में शराब के लगातार और समस्याग्रस्त सेवन का खतरा बढ़ सकता है और साथ ही शराब की लत में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

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भारत में मानसिक स्वास्थ्य के विषय में धारणा

भारत में मानसिक स्वास्थ्य के विषय में धारणा

समाज में मानसिक बीमारी का बोझ बढ़ रहा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से घिरे लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने से, हमारे समाज, अर्थव्यवस्था और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर इसके प्रभाव को अनदेखा कर पाना मुश्किल हो गया है। भारत की आबादी का 20% हिस्सा किसी न किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है।

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आत्महत्या के उत्तरजीवी: पेचीदा शोक के साथ जीना

आत्महत्या के उत्तरजीवी: पेचीदा शोक के साथ जीना

"आज (16 अक्टूबर, 2014) मेरे 20 वर्षीय बेटे ने हाथ से लिखे संदेश में मुझसे कहा था कि वह 'अब और आगे इसे नहीं झेल सकता है' ... मेरा दिल अभी भी यह मानता है कि यह किसी और का बुरा सपना है, जो मेरे सामने है… ” - यूनाइटेड किंगडम की मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट डॉ. संगीता महाजन, जिन्होंने लगभग 4 साल पहले अपने बेटे के आत्महत्या कर लेने से उसे खो दिया था।

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धौंस और युवा मन पर इसका प्रभाव

धौंस और युवा मन पर इसका प्रभाव

अवसाद मनोदशा से जुड़ा एक विकार है, तथा इसकी विशेषताओं में लगातार मूड खराब रहना, उदास रहना और काम में मन न लगना शामिल है। अवसाद से रोजमर्रा की जिंदगी और सामान्य कामकाज बाधित होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 36.9% भारतीय वयस्कों को अपने जीवन में हल्के से मध्यम-गंभीर अवसाद से गुजरना पड़ता है और 1.8% लोगों में बीमारी का संगीन रूप देखा जाता है। विशेष रूप से कामकाजी वयस्कों में अवसाद उच्च स्तर में देखी जाती है और कई अध्ययनों से पता चला है कि उच्च स्तर के तनाव और अवसाद की उपस्थिति के बीच आपसी संबंध है।

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अवसाद के दौरान अपनी कार्यक्षमता को कैसे बरकरार रखें

अवसाद के दौरान अपनी कार्यक्षमता को कैसे बरकरार रखें

अवसाद मनोदशा से जुड़ा एक विकार है, तथा इसकी विशेषताओं में लगातार मूड खराब रहना, उदास रहना और काम में मन न लगना शामिल है। अवसाद से रोजमर्रा की जिंदगी और सामान्य कामकाज बाधित होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 36.9% भारतीय वयस्कों को अपने जीवन में हल्के से मध्यम-गंभीर अवसाद से गुजरना पड़ता है और 1.8% लोगों में बीमारी का संगीन रूप देखा जाता है। विशेष रूप से कामकाजी वयस्कों में अवसाद उच्च स्तर में देखी जाती है और कई अध्ययनों से पता चला है कि उच्च स्तर के तनाव और अवसाद की उपस्थिति के बीच आपसी संबंध है।

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सोशल मीडिया की लत

सोशल मीडिया की लत

‘सोशल मीडिया की लत’ या ‘​इंटरनेट की लत’ हालांकि आधिकारिक तौर पर एक बीमारी के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन बहुत से साइकोलॉजिस्ट्स लंबे समय तक इसका उपयोग करने वालों के व्यवहार में परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं।

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भारत में थेरेपी लेने के दौरान सांस्कृतिक अड़चनें

भारत में थेरेपी लेने के दौरान सांस्कृतिक अड़चनें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि अवसाद की व्यापकता के मामले में दुनियाभर में सबसे ज्यादा अवसादग्रस्त लोग भारत में हैं। यहां 56 मिलियन से अधिक लोग अवसादग्रस्त हैं, इसके अलावा 38 मिलियन लोग चिंता संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। इन संख्याओं के गहरे मायने हैं और इस बात की बहुत संभावना है कि आपका कोई परिचित व्यक्ति भी अवसाद या चिंता से जुड़ी मानसिक बीमारी से पीड़ित हो सकता है।

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कोई सहायता समूह आपके लिए क्या कर सकता है?

कोई सहायता समूह आपके लिए क्या कर सकता है?

मनुष्य, स्वभाव से एक सामाजिक प्राणी है, जो स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के प्रति लगाव और अपनेपन की भावना रखता है। यही कारण है कि, हम जहां भी होते हैं, वहां समुदाय बनाते हैं। किसी समुदाय में परिवार, दोस्तों और विभिन्न अन्य लोग शामिल होते हैं, जिनके साथ हम नियमित रूप से बातचीत करते रहते हैं। हमारे जीवन में समुदाय की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो आसपास की दुनिया के साथ हमारा भावनात्मक सहयोग, सुरक्षा, आराम और आकार प्रदान करता है।

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कलंक और समाज

कृतज्ञता

कृतज्ञता शब्द को कई तरह से परिभाषित किया गया है जैसे, कोई भावनात्मक स्थिति, एक दृष्टिकोण, आदत, व्यक्तित्व से जुड़ा कोई गुण और यहां तक​​कि एक नैतिक धर्म। कृतज्ञता प्रकट करने का मनोभाव एक सकारात्मक मनोविज्ञान का हिस्सा है, जो आशावादी मानवीय कार्यशैली का वैज्ञानिक अध्ययन है।

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कलंक और समाज

कलंक और समाज

समाज द्वारा गलत माना जाने वाला कोई कार्य जिसके लिए लोगों की अस्वीकार्यता या शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है वह कलंक है। ये विशेषताएं नस्लीय या सांस्कृतिक पहचान, यौन पहचान, सामाजिक स्थिति, शारीरिक मौजूदगी, बीमारी या विकलांगता के मामले में हो सकती हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करने की दिशा में कुछ कदम

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करने की दिशा में कुछ कदम

कलंक को कम कर मानसिक रूप से पीड़ित कई अन्य लोगों की सहायता की जा सकती है, ताकि वे आसानी से अपनी समस्याओं के बारे में बात कर सकें। कलंक को कम करने के चरणों के बारे में यहां और जानें

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प्रतिमान विस्थापन: मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017

प्रतिमान विस्थापन: मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017

इस साल 7 जुलाई को, 2017 के मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम को लागू किया गया था। यह ऐतिहासिक कानूनी सिद्धांत अपने पूर्ववर्ती रूप से एक प्रतिमान विस्थापन है, क्योंकि यह मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करने और उन्हें अपराधी जैसा महसूस करवाने के बजाय, उनको स्वीकृति देने के साथ-साथ उपचार और देखभाल के वितरण के दौरान ऐसे अधिकार प्रदान करता है जिनके वे हकदार हैं।

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अपूर्णता से परे: आत्म-प्रेम का अभ्यास

अपूर्णता से परे: आत्म-प्रेम का अभ्यास

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद अधिक आम हो सकता है. सह-घटित कारक जैसे लिंग-आधारित भूमिकाएं, तनाव और जीवन के नकारात्मक अनुभव, अवसाद, उत्कंठा और सहरुग्णता की उच्च दर से संबंधित हैं. यह उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से सत्य है जो एक ही समय में विभिन्न भूमिकाएं निभाती हैं, क्योंकि उन्हें 'परिपूर्णता' के प्रयास के लिए अनुकूलित किया गया है. यह तनाव और परेशानी का कारण बनता है, जो मानसिक स्वास्थ्य सम्बंधित चिंताओं को जन्म देता है.

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नए विचारों के लिए प्रेरणा: क्या खानपान से जुड़ी बुरी आदतें आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं?

नए विचारों के लिए प्रेरणा: क्या खानपान से जुड़ी बुरी आदतें आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं?

पेट भरकर खाना खाने के बाद दोषी महसूस करना, वजन बढ़ जाने के डर से भोजन न करना, अतिरिक्त वजन को कम करने के लिए भूखा रहना और अपने शरीर को लेकर सचेत होना की प्रथा अब पहले से कहीं अधिक प्रचलित है। हम में से कई लोग आवश्यकता महसूस करते हैं कि उन्हें दुबला होना चाहिए और वजन कम करना चाहिए, मगर वज़न बढ़ जाने का नाजायज और निरंतर डर, विकृत शारीरिक छवि विकार का एक लक्षण हो सकता है।

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धौंस और युवा दिमाग पर इसका प्रभाव

धौंस और युवा दिमाग पर इसका प्रभाव

जुलाई 2016 में, एक 14 वर्षीय लड़का स्कूल से लौटा, अपने अपार्टमेंट ब्लॉक की छत पर गया, और कूद कर अपनी जान दे दी. जांच से पता चला कि स्कूल वैन में उसके साथ जाने वाला एक साथी उसे डराया-धमकाया करता था. एक अन्य घटना में, एक मेट्रो शहर के प्रतिष्ठित निजी स्कूल में पढ़ रहे कक्षा 9 के एक छात्र ने बताया की अपने सहपाठियों द्वारा उत्पीड़ित किये जाने के कारण वह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक आघात से गुजर रहा था. यह बात तब सामने आई जब एक साधारणत: मृदुभाषी और संस्कारी बच्चा हिंसक हो गया. धौंस जमाना और डरना-धमकना भारत में हर जगह मौजूद हैं, परन्तु फिर भी यह बेहद कम रिपोर्ट किया जाता हैं.

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आप कितनी अच्छी तरह से अपनी दोस्ती जानते हैं?

आप कितनी अच्छी तरह से अपनी दोस्ती जानते हैं?

हम में से अधिकांश अपने दोस्तों को अच्छी तरह से जानने का दावा करते हैं, और हमारे सबसे अच्छे दोस्त भी बेहतर हैं, लेकिन हम में से कितने लोग उनके साथ की 'दोस्ती' समझते हैं? क्या हम जानते हैं कि एक ही रिश्ते में कितने तरह की दोस्ती का अस्तित्व हो सकता है? क्या हम जानते हैं कि किसी व्यक्ति के साथ हमारी दोस्ती की प्रकृति हमारे मानसिक कल्याण को प्रभावित कर सकती है?

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आप कितनी अच्छी तरह से अपनी दोस्ती जानते हैं?

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य: ज्यादा जिम्मेदारियां, ज्यादा तनाव

तुम कौन हो? एक बेटी? एक माँ? एक पत्नी? एक गृहस्थ? एक कामकाजी महिला? एक दोस्त? एक बहन? इत्यादि। महिलाएं एक ही दिन में एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं। इन भूमिकाओं में से प्रत्येक भूमिका की सामाजिक संरचना और उसके चयन के कारण उन पर उम्मीदों का बोझ लदा होता है। क्या हमने कभी सोचा है कि इन भूमिकाओं से जुड़े दबाव और अपेक्षाएं उचित हैं?

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क्यों हम बुजुर्गों में अवसाद के लक्षणों की अनदेखी करते हैं

क्यों हम बुजुर्गों में अवसाद के लक्षणों की अनदेखी करते हैं

एक मज़बूत सामाजिक तानेबाने के बिना जैसे-जैसे हम एकल समाज की ओर बढ़ रहे हैं, अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 30 करोड़ से अधिक लोग अवसादग्रस्त हैं। अवसाद एक ऐसी मानसिक बीमारी है जो अलग-अलग लोगों और आयुवर्गों में अलग तरह से असर दिखाती है और सामने आती है।

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नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य

नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य

क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आप तनाव से कुछ राहत पाने के लिए दवाओं या शराब का उपयोग कर रहे हैं? क्या आपने कभी पाया है कि अपनी नियमित गतिविधियां पूरी करने के लिए आपको किसी प्रकार की दवा या शराब की उत्तेजना की आवश्यकता है? क्या वे लोग जिनके साथ आप ज्यादा समय बिताते हैं, वे आपको सुझाव देते हैं कि आप शराब या नशीली दवाओं का सेवन करना बंद कर दें?

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Men and Mental Health

पुरुष और मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य विकार बढ़ रहे हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में कम से कम 13.7% व्यक्ति अपने जीवनकाल में मानसिक बीमारी से पीड़ित होंगे। सामान्यतः महिलाओं में सामान्य मानसिक बीमारी (सीएमडी) से पीड़ित होने की संख्या पुरुषों की तुलना में दो गुना अधिक होती हैं। हालांकि इस विसंगति के पीछे के कुछ कारणों में हार्मोन और जीवविज्ञान शामिल हो सकता है, अन्य कारणों में हमारे चारों ओर का सांस्कृतिक वातावरण शामिल है।

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पुरुषों में अवसाद और चिंता

वर्ष 2015 में यह माना गया था कि विश्वभर में अवसाद से पीड़ित लोगों की संख्या 322 मिलियन है। भविष्य में इन आंकड़ों के बढ़ने की ही आशंका है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अवसाद और चिंता जैसे विकारों को पहचानने और सहायता लेने की स्थिति निम्न स्तरीय होने के कारण वैश्विक रूप से हर साल एक ट्रिलियन यूएस डॉलर का नुकसान होता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों के अवसाद के बारे में अक्सर कम ही पता चल पाता है।

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Stress during exams

दैनंदिन भाषा में सतर्कता और समानुभूति कैसे बरतें

अंग्रेज़ी में बातचीत करने का सबसे मज़ेदार पहलू यह है कि हमारी साधारण जिंदगी (एवं भाषाओं) से जुडे शब्द बहुत आसानी से सम्मिलित हो जाते हैं। इससे चलती भाषा का प्रचलन बढ़ जाता है, जिसका उपयोग हँसी-मज़ाक या छेड़खानी करने के लिए किया जाता है। क्योंकि हम सामाजिक जीव हैं, सबके साथ सामन्जस्य बनाकर चलना हमारी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है। ऐसे दलों का गठन करते समय हम उन लोगों को बाहर छोड़ देते हैं जिनकी योग्यता कमतर लगती है। इस कारणवश चिकित्सकीय / मनोविकार से जुड़े शब्दों का प्रयोग अपमानजनक लग सकता है। इसलिए, दूसरों से छेड़छाड़ करने या उनका मज़ाक उड़ाने के लिए हम किस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं इसे लेकर हमें सचेत रहना चाहिए।

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Stress during exams

परीक्षा के दौरान स्वयं की देखभाल

परीक्षा के दौरान व्यग्र महसूस कर रहे हो? परीक्षा सिर पर है और इस समय बेचैन और व्यग्र महसूस करना स्वाभाविक है।

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