फाउंडेशन के बारे में


“लिवलवलाफ हर उस व्यक्ति को उम्मीद देना चाहता है जो तनाव, चिंता और अवसाद का सामना कर रहा है।”

अपने आशय में लिवलवलाफ एक सोच, एक आंदोलन है, और उम्मीद का रूपक है।चिंता और अवसाद की अपनी व्यक्तिगत यात्रा से उबरकर अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने लिवलवलाफ (एल एल एल) की स्थापना 2015 में की थी। यह फाउंडेशन ज्ञान और प्रक्षेत्र विशेषज्ञता के मेल से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, मानसिक बीमारी से जुड़े कलंक को मिटाता है और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में भरोसेमंद संसाधन उपलब्ध करवाता है।

एल एल एल के कार्यक्रम और आउटरीच गतिविधियां भागीदारी और सहयोग के माध्यम से संचालित और कार्यान्वित किए जाते हैं।

संस्थापक


“मुझे अब भी याद है कि 15 फरवरी 2014 की सुबह मैं अपने पेट में एक खोखलेपन के एहसास के साथ जगी थी। मुझे खालीपन और दिशाहीनता महसूस हो रही थी। मैं चिड़चिड़ी हो गयी थी और सिर्फ रोती रहती थी। मुझे एक साथ बहुत सारे काम करना पसंद है पर अब निर्णय लेना भी अचानक से एक बोझ जैसा लगने लगा था। हर सुबह जागना एक संघर्ष बन गया था। मैं थक चुकी थी और अक्सर सब कुछ छोड़ देने के ख़्याल आते थे।


“मेरी माँ को एहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है और इसलिए उन्होंने मुझे किसी पेशेवर से मदद लेने के लिए कहा। इसके बाद मेरा उत्कंठा और अवसाद का निदान हुआ।


“जो प्यार और समर्थन मुझे अपने परिवार, काउंसेलर और मनोचिकित्सक से मिला उससे उन अंधकारमय दिनों में मेरा हौसला बना रहा।

''इस स्थिति से उबरने की यात्रा के दौरान मुझे मानसिक बीमारी से जुड़े कलंक और इसके प्रति जागरूकता की कमी का आभास हुआ और ऐसा लगने लगा कि मुझे कम से कम एक जान तो बचानी ही है। इसी ज़रूरत से मुझे अपनी बीमारी का सार्वजनिक रूप से खुलासा करने और द लिव लव लाफ फाउंडेशन की स्थापना करने की प्रेरणा मिली।

“मानसिक बीमारी ने हमारे सामने एक बेहद कठिन चुनौती पेश की है। पहले से कहीं ज़्यादा आज के समय की मांग यही है कि हम मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों सहित हर व्यक्ति की ज़रूरतों को प्राथमिकता दें। 

“इस बीमारी के साथ मेरा रिश्ता कभी प्यार तो कभी नफरत भरा रहा है और इसने मुझे बहुत कुछ सिखाया है - धीरज रखना, यह कि आप अकेले नहीं हैं और सबसे ज़रूरी बात यह कि उम्मीद कायम है।"

ट्रस्टी के बारे में

एना चैंडी


अध्यक्ष

एना चैंडी लगभग तीन दशकों से भारत के मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वह लोगों और परिवारों को सलाह देने के अलावा परामर्शदाताओं (काउंसेलर) को ट्रेनिंग और सलाह देती हैं। साथ ही वह देश के मानसिक स्वास्थ्य तंत्र में प्रणालीगत बदलाव लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रणनीतिक हस्तक्षेप की अगवाई भी करती आ रही हैं। काउंसेलिंग पेशे में अंतरराष्ट्रीय मानकों और नैतिक व संबंधपरक दृष्टिकोण के पक्षसमर्थन के माध्यम से एना ने भारत में काउंसेलिंग पेशे में बदलावों में अहम भूमिका निभायी हैं।

डॉ श्याम भट


डॉ श्याम साइकियाट्रिस्ट एवं चिकित्सक हैं और मनोरोग, आंतरिक चिकित्सा तथा साइकोसोमैटिक चिकित्सा में स्नातकोत्तर प्रशिक्षण और बोर्ड सर्टिफिकेशन प्राप्त हैं। इनके अलावा उनके पास पूर्वी दर्शन और उपचारात्मक पद्धतियों की गहरी समझ और 20 साल का अपार अनुभव है। उन्हें भारत में इंटीग्रेटिव चिकित्सा और होलिस्टिक मनोचिकित्सा का अग्रणी माना जाता है।

किरण मजूमदार शॉ


किरण बायोकॉन की अध्यक्ष और प्रबंध संचालक हैं। वे एक अग्रणी बायोटेक उद्यमी और पद्म भूषण (2005) और पद्म श्री (1989) की प्राप्तकर्ता हैं। किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध किरण को कई वैश्विक अभिज्ञान हासिल हैं। हाल ही में, वे गेट्स फाउंडेशन की "गिविंग प्लेज" पर हस्ताक्षर करने वाली दूसरी भारतीय बनीं।

डॉ मुरली दोराईस्वामी


डॉ मुरली दोराईस्वामी ड्यूक यूनिवर्सिटी हेल्थ सिस्टम (यूएसए) में प्रोफेसर तथा डाक्टर हैं और मस्तिष्क एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष विशेषज्ञों में से एक हैं। वह ड्यूक इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेन साइंसेस के सदस्य होने के साथ-साथ एक मशहूर क्लिनिकल ट्रायल्स इकाई का काम भी देखते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य में आज व्यापक रूप से इस्तेमाल की जानी वाली कई थेरेपी के विकास में शामिल रही है।

अनंत नारायणन


अनंत नारायणन भारत में सबसे बड़ी ई-स्वास्थ्य कंपनी मेडलाइफ के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं जो फार्मेसी, डायग्नोस्टिक्स और ई-परामर्श के व्यवसाय से जुड़ी है। इससे पहले वह देश की सबसे बड़ी फैशन और लाइफस्टाइल उत्पादों की वेबसाइट मिंत्रा और जाबोंग के सीईओ भी रह चुके हैं। अनंत ने अपना करियर मैकींजे एंड कंपनी में बतौर निर्देशक शुरू किया जिसमें उनकी जिम्मेदारी एशिया में उत्पाद विकास संभालने के अलावा रणनीति और परिचालन पर कंपनियों से सलाह मशविरा करने की थी।

टीम से मिलें

अनीशा पादुकोण


सीईओ

अनीशा 2016 से फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने फाउंडेशन की गतिविधियों और ऐतिहासिक पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बतौर सीईओ एलएलएल के ट्रस्टियों के बोर्ड द्वारा प्रस्तावित रणनीतिक सुझावों को लागू करना, सहभागिता के नए अवसरों की खोज करना और फाउंडेशन के सुचारु संचालन के लिए वे ज़िम्मेदार हैं। विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल फ्यूचर काउंसिल फॉर मेंटल हेल्थ की वे सदस्य भी हैं। अनीशा के पास मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री है और उन्होंने हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल और अशोका विश्वविद्यालय से स्ट्रेटेजिक नॉन प्रॉफ़िट मैनेजमेंट इंडिया कोर्स पूरा किया है। प्राथमिक देखभालकर्ता के रूप में मानसिक बीमारी के दुष्प्रभावों को उन्होंने करीब से अनुभव किया है और वे मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रभावशाली बदलाव लाने की उम्मीद रखती हैं।

लेखा गोंधकर


डिजिटल हेड

लेखा प्रौद्योगिकी और प्रबंधन में अपने अनुभव को जोड़ते हुए फाउंडेशन में डिजिटल पोर्टफोलियो का नेतृत्व करती हैं। उन्होंने वैश्विक बाज़ारों में उच्च गुणवत्ता वाले सॉफ्टवेयर उत्पादों को वितरित करने के लिए बहु-राष्ट्रीय उत्पाद विकास संगठनों में अग्रणी भूमिका निभाई है। कार्यकारी नेतृत्व टीमों सहित कई हितधारकों के साथ संपर्क से उन्हें अपार मूल्य और सफलता प्रदान करने में मदद मिली है। लेखा सामाजिक अभियानों के प्रति उत्साही हैं और उनका मानना है कि दुनिया को ज़्यादा से ज़्यादाज़्यादा अच्छे उपक्रमों की जरूरत है। जीवन के प्रति उनका उत्साह, प्रतिबद्धता से प्रेरित दृष्टिकोण और सकारात्मक रवैय्या काम और जीवन में उनके सहायक रहे हैं। काम के अलावा लेखा को परिवार के साथ समय बिताने, नई जगहों की यात्रा करने, व्यंजनों के साथ प्रयोग करने और साहसिक खेलों का ज़्यादा से ज़्यादा आनंद लेने में मज़ा आता है। लेखा ने यूसीएलए से सामान्य प्रबंधन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है।

ब्रायन कार्वाल्हो


संचार और पीआर के प्रमुख

ब्रायन फाउंडेशन की संचार रणनीति बनाते हैं और मीडिया आउटरीच का प्रबंधन करते हैं। इन्हें मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त है। ये सहयोग की शक्ति और आजीवन 'छात्र बने रहने' में विश्वास रखते हैं। संस्थापकों, नेतृत्व करने वालों और उच्च प्रदर्शन टीमों के साथ मिलकर इन्हें ज़बरदस्त परिणामों के लिए काम करना पसंद है। जब वे काम नहीं कर रहे होते हैं तब वे अपनी परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। ब्रायन लंबी दूरी की दौड़ और संगीत का भी आनंद लेते हैं और दो दशकों से विभिन्न अभियानों के लिए पैसे जुटाने के प्रयासों के लिए इन्होंने दोनों का उपयोग किया है।

कायनात


कार्यक्रम प्रबंधक

कायनात ने दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली विश्वविद्यालय से सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। इससे पहले इन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मनोविज्ञान में बीए की डिग्री हासिल की है। टीएलएलएलएफ से कार्यक्रम प्रबंधक के रूप में जुड़ने से पहले नई दिल्ली के द हंस फाउंडेशन में दो साल तक इन्होंने कार्यक्रम टीम के साथ काम किया है। इनकी परियोजना विशेषज्ञताओं में सुविधावंचित महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य, आजीविका, लिंग, विकलांगता और शिक्षा जैसे क्षेत्र मुख्य रूप से शामिल हैं। इनका मानना है कि सामूहिक काम और सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य सशक्तीकरण के एक उपकरण हैं और ये इनकी एक उत्साही समर्थक हैं। अपने खाली समय में कायनात अपनी बिल्ली नूरी के साथ लगातार टीवी देखना पसंद करती हैं। इन्हें घूमने और अलग-अलग व्यंजन चखने में मज़ा आता है। कायनात पशु प्रेमी, यात्री एवं खाने तथा बेकिंग की शौकीन हैं... लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये पूरी तरह से मानसिक स्वास्थ्य की समर्थक हैं।

हिमांशी सिंह


डोनर इंगेजमेंट मैनेजर

हिमांशी विकास कार्यों से जुड़ी हुई हैं और एक नेटवर्किंग विशेषज्ञ हैं। गैर लाभकारी और सामाजिक उद्यम क्षेत्र में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक की उपाधि और भारत के अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय से विकास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। द लिव लव लाफ फाउंडेशन में वे अभी डोनर इंजेगमेंट मैनेजर का पद संभाल रहीं हैं। 

एलएलएल में उनकी ज़िम्मेदारियों में सीएसआर अफसरों, बहुपक्षीय संस्थानों, सरकारी एजेंसियां एवं परोपकारी व्यक्तियों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना शामिल है ताकि एलएलएल के कार्यक्रम के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के वैश्विक मुद्दे पर जागरूकता और योगदान में बदलाव लाया जा सके।

इससे पहले हिमांशी जयपुर रग्ज़ में बतौर डेवलपमेंट मैनेजर काम करती थीं जहाँ उन्होंने “सोशल इनोवेशन लैब्स के माध्यम से वैश्विक लक्ष्यों के स्थानीयकरण” पर एक व्यवसाय योजना का विकास किया था। इन इनोवेशन लैब्स ने मानकीकरण के रूप में कार्य किया और भारत में राजस्थान के विभिन्न गांवों और जेलों में इन्हें दोहराया गया। इस व्यापार योजना को २०२१ के संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर यूएन यूनाइटिंग बिजनेस लाइव में भी प्रदर्शित किया गया था। हिमांशी भारतीय ग्रामीण समुदायों के उत्थान की आवाज हैं और उन्होंने न्यू  यॉर्क फैशन वीक, संकल्प फोरम और संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे विभिन्न प्लेटफार्मों पर उनका प्रतिनिधित्व किया है।

हिमांशी का दृढ़ विश्वास है कि संसाधनों तक समान पहुंच के माध्यम से व्यक्ति और देश की बेहतर आर्थिक स्थिति एवं सामाजिक उत्थान संभव है।

अंकिता मैथ्यूस


प्रोग्राम असिस्टेंट

अंकिता ने अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु से विकास में परास्नातक की डिग्री और स्टेला मैरिस कॉलेज, चेन्नई से समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। परास्नातक   डिग्री की पढ़ाई के दौरान जब वे पब्लिक हेल्थ में विशेषज्ञता प्राप्त कर रही थीं, तब उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में, जो मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, अपना करियर बनाने में गहरी रुचि विकसित की। वह मानसिक स्वास्थ्य की प्रबल पक्षसमर्थक हैं और एक ऐसे समाज की उम्मीद करती हैं जहां मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रति प्यार और स्वीकृति की भावना होगी। एलएलएल में शामिल होने से पहले वे अर्न्स्ट एंड यंग एलएलपी में शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में प्रोजेक्ट परियोजना कोऑर्डिनेटर कोऑर्डिनेटर  समन्वयक   के रूप में काम करती थीं। उन्हें अपने परिवार एवं कुत्तों से बेहद प्यार है और वे अपने दिन की शुरुआत बेहतरीन कसरत के साथ करना पसंद करती हैं।

सूफिया सहर घोरी


डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर

सूफिया ने सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से कम्यूनिकेशन मैनेजमेंट (संचार प्रबंधन) में एमबीए और माउंट कार्मेल कॉलेज से बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातक की डिग्री हासिल की है। रिटेल, एफएमसीजी, लग्जरी, ऑटो, कॉरपोरेट जैसे उद्योगों में ब्रांडों के डिजिटल और सोशल मीडिया मार्केटिंग प्रयासों और एम्प्लॉयर ब्रांडिंग घोषणापत्रों पर बड़े पैमाने पर काम करने के बाद उन्होंने डिजिटल इकोसिस्टम की मजबूत समझ हासिल की है। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की परिवर्तनकारी शक्ति में वे दृढ़ विश्वास रखती हैं और उम्मीद करती हैं कि एक दिन मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद मांगना उतना ही सामान्य हो जाएगा जितना कि व्यायाम करना या अपने शारीरिक स्वास्थ्य को नियंत्रण में रखने के लिए जिम जाना है। अपने अवसर समय में सूफिया को खाना बनाना, यात्रा करना, नए रेस्तरां आज़माना, अपने परिवार के साथ समय बिताना और बिंज वाच के लिए रोमांचक शो की खोज करना पसंद है।

अरुल


प्रबंधक

अरुल के पास मैकेनिकल क्षेत्र में शिक्षा के साथ आईटीआई का अनुभव है। इन्होंने 18 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय सेना में काम किया है और अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षमताओं में एक प्रशासक की भूमिका निभाई है। अरुल ने बैंगलोर में बैट विंग्स लर्निंग सेंटर में प्रशासनिक कार्यभार और इवेंट से जुड़ी गतिविधियों को संभाला है। विभिन्न खेलों में अरुल की भागीदारी ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सेना में अनुभव के कारण अरुल फाउंडेशन के लक्ष्यों और गतिविधियों के लिए प्रतिबद्ध, अनुशासित और समर्पित है। अरुल फाउंडेशन के  प्रशासनिक प्रबंधक हैं।

एनेबेल जी कोरिया


ईए टू सीईओ

एनेबेल फाउंडेशन के सीईओ के लिए ईए की भूमिका निभाती हैं। इनके पास विभिन्न संगठनों के व्यवस्थापक विभागों में काम करने का 15 वर्षों का अनुभव है। इन्हें धर्मशास्त्र में डिग्री और सचिवीय डिप्लोमा हासिल है। इन्हें टीम लीड और वरिष्ठ सचिव की क्षमता में काम करने का अनुभव है। ये अपने मज़बूत नियोजन, निष्पादन और आयोजन कौशल के साथ फाउंडेशन की व्यवस्थापक और दूसरी कार्यात्मक गतिविधियों का प्रबंधन करती हैं। एनेबेल एक टीम प्लेयर हैं, इनका रवैया उत्साहजनक है और ये हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहती हैं। काम के अलावा ये अपने परिवार के साथ समय बिताती हैं और दूसरे कई शौक रखती हैं।

डोनर और स्वयंसेवी

डोनर
वित्त वर्ष 2020-2021
विदेशी डोनर
वित्त वर्ष 2020-2021
स्पांसरशिप
वित्त वर्ष 2020-2021
स्वयंसेवी

प्रशंसा पत्र

हम  2017  से टी एल एल एल एफ के भागीदार हैं और  "आप अकेले नहीं हैं"  प्रोग्राम के माध्यम से  हम अब त‌क  5000  से ज्यादा छात्रों और  300  से ज्यादा शिक्षकों तक पहुंच चुके हैं।  “आप अकेले नहीं हैं” कार्यक्रम के माध्यम से जो बड़ा बदलाव मुझे दिखाई दे रहा है वह है मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति ग्रहणशीलता का बढ़ना और यह केवल स्कूली बच्चों और शिक्षकों तक सीमित नहीं है। अब इसमें माता – पिता और प्रशासन भी शामिल हैं, जो वृहत स्कूल पारिस्थितिकी तंत्र / इकालजी का हिस्सा हैं। मुझे लगता है कि यह “आप अकेले नहीं हैं” कार्यक्रम की कुंजी है।

मुझे लगता है कि मेरे लिए सबसे यादगार पल वे रहे हैं जब हम सत्र समाप्त करते हैं और बच्चे कक्षा से बाहर निकलने के बाद हमसे मिलने वापस आते हैं और यह कहकर हमें धन्यवाद देते हैं कि हमने चिंता, अवसाद, शारीरिक छवि को लेकर शर्मिंदा किए जाने के बारे में और बुलिइंग के बारे में चर्चा की। मूल रूप से,  हमने उनके उस अनुभव को एक “नाम” दिया है जिसे वे पहले से‌  ही महसूस कर रहे हैं, और यह वास्तव में उनकी मदद करता है। सत्र में बैठना उनके लिए बहुत राहत भरा था। उन बच्चों के चेहरे मेरे लिए इस अनुभव का सबसे महत्वपूर्ण अंश है।


कनेक्टिंग ट्रस्ट , पुणे

एलएलएल के साथ जुड़ना हमारे लिए बहुत कीमती अनुभव रहा है, क्योंकि उनके माध्यम से हम स्कूलों से संपर्क करके इतने सारे छात्रों की मदद करने में सक्षम हो पाए हैं। इसने हमें स्कूलों,  छात्रों,  प्राचार्यों और शिक्षकों से मिलने और सत्रों को उन तक पहुंचाने के लिए एक मंच दिया है।  साझेदारी का यह सफर अब तक बहुत ही  शानदार रहा है।

जब हम स्कूलों से संपर्क करते हैं तो उत्सुकता का स्तर बहुत ही अधिक होता है। सभी स्कूल इस बात से सहमत हैं कि इस विषय पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। कई बार वे हमें खुशी से अनुमति दे देते हैं, मगर कभी-कभी ऐसा भी होता है कि वे आशंकित हो जाते हैं क्योंकि यह एक संवेदनशील विषय है और इसे लेकर आंतरिक चर्चा करने और निर्णय लेने के लिए वे हमसे समय मांगते हैं।

कुल मिलाकर,  जब हम सत्र लेते हैं,  तो वे आमतौर पर  "अवसाद"  और  "चिंता" जैसे शब्दों के बारे में जानते तो हैं,  लेकिन वे ये नहीं जानते कि इनका वास्तव में क्या मतलब है। वे आमतौर पर भ्रमित होते हैं और मानते हैं कि उदासी और अवसाद  ‌एक ही चीज है। सत्र के बाद  कई छात्र हमारे पास यह कहने के लिए आते हैं कि उन्हें जो कुछ भी यहां बताया गया है,  वे उन बातों को अपने अनुभवों के साथ जोड़ पा रहे हैं,  क्योंकि इनमें से कुछ लक्षणों की पहचान वे अपने अंदर या अपने प्रियजनों में कर पा रहे हैं। साथ ही वे हमें यह भी बताते हैं कि यह एक बहुत ही उपयोगी जागरूकता है जो हमने उन तक पहुंचाई है। यही कारण है कि हम इस कार्यक्रम से जुड़े हैं –  जागरूकता को उस स्तर तक पहुंचाना चाहते हैं। ”


मंथन , अहमदाबाद

‘मानसिक स्वास्थ्य’ के अगली महामारी बनने के आसार नज़र आ रहे हैं, और इस संदर्भ में द लिव लव लाफ फाउंडेशन के योगदान की व्यापकता प्रशंसनीय है। यह जानना बहुत संतोषजनक है कि द लिव लव लाफ फाउंडेशन जैसे संगठन मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को मिटाने पर काम कर रहे हैं और ऐसे लोगों की सहायता कर रहे हैं जो इन मुद्दों से जूझ रहे हैं।

द लिव लव लाफ फाउंडेशन सामाजिक जागरूकता पैदा करने में एक अहम भूमिका निभा रहा है और अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित जानकारी के माध्यम से पीड़ित लोगों तक यह जानकारी पहुंचा रहा है कि मानसिक पीड़ा की स्थिति में वे हमारे हेल्पलाइन पर कॉल कर मदद ले सकते हैं। आपकी गतिशील और दयालु संस्थापक के साथ आपकी प्रतिबद्ध टीम मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

मित्रम फाउंडेशन को इस मूल्यवान कार्य का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है और हम द लिव लव लाफ फाउंडेशन द्वारा लगातार मिल रहे सहयोग के लिए उनके बहुत आभारी हैं।

कृतज्ञता सहित,

वनिता नवल और डॉ. नितेश दवे

मैनेजिंग ट्रस्टी, मित्रम फाउंडेशन

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