प्रभाव

ग्रामीण कार्यक्रम का प्रभाव

  • 13415
    मानसिक बीमारियों वाले लोगों का इलाज
  • 26830
    देखभाल करने वालों का समर्थन
  • 23540
    समुदाय के हितधारक

जिन जगहों पर काम किया गया

    • कर्नाटक (दावणगेरे, मैसूर, गुलबर्गा, बीदर, बेलगावी)
    • मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा)
    • हिमाचल प्रदेश (कंगड़ा) 
    • तमिलनाडु (तिरुवल्लुर, तेनी)
    • उड़ीसा (कोरापुट, पुरी, कटक)
    • केरल (इडुक्की)

    जमीनी स्तर पर प्रभाव

    इलाज का खर्च कम हुआ

    • दावणगेरे में पहल के हिस्से के रूप में इलाज और दवाएँ मुफ़्त में उपलब्ध कराई गईं जिससे इलाज का खर्च महीने में 3000-4000 रुपये से घटकर शून्य हो गया 
    • लक्ष्मीपुर में पहल के हिस्से के रूप में दवाएँ घर-घर मुफ़्त में पहुँचाया गया जिसके कारण दवाओं का खर्च महीने में 5000-9000 रुपये से घटकर शून्य हो गया

    उम्मीद की कहानियाँ

    दोबारा पूछो अभियान - 2016

    दोबारा पूछो साल 2016 में शुरू किया गया मानसिक स्वास्थ्य पर भारत का पहला सार्वजनिक जन जागरूकता अभियान था जिसने डिजिटल, प्रिंट, बाहरी, रेडियो और टेलीविजन माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुँचकर उनमें मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता को बढ़ाया और इसके बारे में बातचीत को सामान्य बनाया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों में समानुभूति पैदा करना और उन्हें मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों की ओर मदद का हाथ बढ़ाने के लिए बढ़ावा देना था।

    3 मिलियन

    2016 में एलएलएल के सभी सोशल मीडिया चैनलों को मिलाकर 3 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज़

    198%

    इस अभियान के शुरू होने के बाद भारतीय मीडिया में मानसिक स्वास्थ्य पर संपादकीय कवरेज में 198 प्रति शत वृद्धि हुई है

    7,86,000

    अभियान के शुरू से होने के बाद डिप्रेशन पर 7,86,000 बार बातचीत हुई (26% वृद्धि)

    शर्मिंदा नहीं हूँ अभियान - 2018

    शर्मिंदा नहीं हूँ  (#NotAshamed) अभियान की शुरुआत 2018 में जागरूकता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को दूर करने और इन अनुभवों से गुजर चुके लोगों को आगे आकार मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए हुई थी।

    96%

    इन अनुभवों से गुजर चुके लोगों में से 96 प्रति शत ने बताया कि उन्होंने इस अभियान के बारे में अपने दोस्तों, परिवारजनों और सहकर्मियों से बात की है

    56%

    इन अनुभवों से गुजर चुके लोगों में से 56 प्रति शत को इस अभियान के रिलीज होने के बाद भारतीय मीडिया में मानसिक स्वास्थ्य पर संपादकीय कवरेज के कारण आज़ादी, उम्मीद, सशक्तिकरण, समानुभूति और उत्सुकता महसूस हुई

    32%

    आम जनता में से 32 प्रति शत ने कहा कि वे अवसाद से पीड़ित लोगों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील और समझदारी से पेश आएंगे

    मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की सूची

    250+

    मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की जानकारी मदद की खोज करें पेज पर

    हेल्पलाइन

    15

    मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की जानकारी मदद की खोज करें पेज पर

    उम्मीद की कहानियाँ

    "मैंने सुनिश्चित किया कि उसे सहायता मिले और जब भी उसे ज़रूरत हो वह चिकित्सा पेशेवरों तक पहुँच सके"

    November 2022
    डेविड लिआनो

    एक पर्वतारोही होने के नाते, मैंने दुनिया की सबसे ऊँची चोटियों पर अपने जीवन के कुछ सबसे सुखद पल जीए हैं

    पुरस्कार एवं मान्यताएँ

    द सीएसआर यूनिवर्स सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड, 2023

    लिवलवलाफ को मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण श्रेणी में साल 2023 में सीएसआर यूनिवर्स सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड मिला।

    टाइम अवॉर्ड

    हमारी फाउंडर दीपिका पादुकोण को मानसिक स्वास्थ्य की पक्षसमर्थक/अधिवक्ता और अभिनेत्री के रूप में उनके काम के लिए साल 2022 में टाइम100 इम्पैक्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। टाइम100 इम्पैक्ट अवॉर्ड विश्व के उन लीडरों/नेताओं का सम्मान करता है जो अपने कार्यक्षेत्र और दुनिया को आगे बढ़ाने के लिए अभिनव प्रयास कर रहे हैं।

    क्रिस्टल अवार्ड, 2020

    अभिनेत्री और द लिवलवलाफ फाउंडेशन (टीएलएलएलएफ) की फाउंडर दीपिका पादुकोण को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2020 के एनुअल मीटिंग में 26-वें एनुअल क्रिस्टल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा स्थापित क्रिस्टल पुरस्कार उन कलाकारों और सांस्कृतिक हस्तियों की उपलब्धियों को मान्यता देता है जो अपने नेतृत्व के माध्यम से इंक्लूसिव (समावेशी) और सस्टेनेबल चेंज को प्रेरित करते हैं।

    डॉ गुइस्लैन “ब्रेकिंग द चेन्स ऑफ स्टिग्मा” पुरस्कार, 2019


    लिव लव लाफ फाउंडेशन (टीएलएलएलएफ) को प्रतिष्ठित डॉ गुइस्लैन "ब्रेकिंग द चेन्स ऑफ स्टिग्मा" पुरस्कार मिला। वैश्विक पुरस्कार, जो गेन्ट, बेल्जियम में डॉ. गुइसलेन संग्रहालय और जैनसेन रिसर्च एंड डेवलपमेंट एलएलसी की एक पहल है, ने भारत में मानसिक बीमारी के बारे में बातचीत को बदलने के लिए एलएलएल के प्रयासों को सम्मानित किया।

    "जन जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर कलंक को कम करके हमने बड़े पैमाने पर मानसिक बीमारी वाले लोगों के लिए एक इकोसिस्टम बनाया है। हमने देखभाल करने वालों के स्ट्रेस और आर्थिक बोझ को भी कम किया है। इससे मानसिक बीमारी से पीड़ित कई लोगों के जीवन में स्थिरता आई है और वे आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो गए हैं। ये सारा काम एलएलएल के सहयोग से हो रहा है।"

    संतोषा एस
    सीनियर प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर
    द एसोसिएशन ऑफ पीपल विद डिसेबिलिटी

    "कार्य के माध्यम से उम्मीद - दीपिका पादुकोण और टीएलएलएलएफ का महत्वपूर्ण संदेश। आत्महत्या की रोकथाम के अपने सामूहिक लक्ष्य की ओर हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए।"

    डॉ. समीर पारिख (ट्विटर/एक्स पर)
    साइकियाट्रिस्ट और चेयरपर्सन
    फोर्टिस नैशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम

    "एक संस्था के रूप में हम कई कारणों से आपके शुक्रगुजार हैं। आप उन करोड़ों युवा भारतीयों के लिए उम्मीद की एक किरण हैं जो मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। हमें आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि पिछले 5 सालों से ज़्यादा समय से हम एलएलएल के ऑफिसियल वेबसाईट पर लिस्टेड हैं। इस लिस्टिंग के बाद से हमारे हेल्पलाइनों पर भावनात्मक मदद और समर्थन के लिए आने वाली कॉलस की संख्या 50 प्रति शत से ज़्यादा बढ़ गई है।"

    हमारे हेल्पलाइन पार्टनर - लाइफलाइन कोलकाता - की तरफ से

    "मुझे द लिवलवलाफ फाउंडेशन के इंस्टाग्राम पेज के जरिए वॉयस दैट केयर्स के बारे में पता चला। विवरण देखने के बाद मैंने तुरंत मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर घुमाया। मेरी समस्याओं के बारे में सलाह देते समय काउंसलर बहुत शांत और विनम्र तरीके से पेश आए और उन्होंने मुझे अपने मानसिक आघात (मेंटल ट्रॉमा) से निपटने के लिए कुछ सुझाव दिए। काउंसलर से बात करने के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और मुझे जीवन को देखने का एक नया नजरिया मिला है।"

    एलएलएल वेबसाइट के माध्यम से
    वॉयस दैट केयर्स हेल्पलाइन से सहायता मांगने वाले एक कॉलर

    "द लिव लव लाफ फाउंडेशन का ग्रामीण कार्यक्रम बहुत अनोखा है और इसका दृष्टिकोण व्यापक है। यह तीन स्तरों पर बदलाव लाता है - व्यक्तिगत स्तर, पारिवारिक स्तर और सामुदायिक स्तर।"

    अनिल पाटिल,
    संस्थापक एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर
    केयर्रस वर्ल्डवाइड

    "लिव लव लाफ फाउंडेशन और केयर्रस वर्ल्डवाइड का विशेष रूप से धन्यवाद क्योंकि उनके बिना तिरुवल्लूर जिले में यह प्रोजेक्ट संभव नहीं हो पाता।"

    सुसईराज
    प्रोग्राम मैनेजर
    वसंथम फेडरेशन ऑफ डिफरेंटली एबल्ड पर्सन्स

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