आप अकेले नहीं हैं

स्कूलों के लिए किशोर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

किशोरावस्था में कई अद्भुत नए अनुभव और बड़े बदलाव होते हैं जिससे यह एक मुश्किल समय हो सकता है। परीक्षा और भविष्य की योजना बनाने से लेकर महामारी के चलते अकेलेपन का एहसास और अपनी पहचान की खोज जैसे कई कारण हैं जो उम्र के इस पड़ाव पर उनके मानसिक कल्याण को प्रभावित कर सकते हैं। शुरुआती उम्र से ही मानसिक स्वास्थ्य को सही तरीके से संबोधित किए जाने से किशोरों को आगे चलकर खुशहाल जीवन जीने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम के बारे में

आप अकेले नहीं हैं की शुरुआत 2016 में हुई थी। इस कार्यक्रम के तीन उद्देश्य हैं: किशोरों में तनाव, चिंता और अवसाद के बारे में जागरूकता फैलाना, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत को स्वाभाविक बनाना और उनके लचीलेपन को बढ़ाना।  शिक्षकों, माता-पिता और अभिभावकों से संपर्क स्थापित कर उन तक मानसिक स्वास्थ्य के बारे में उचित जानकारी और संसाधन पहुंचाकर यह कार्यक्रम किशोरों की सहायता प्रणाली को मज़बूत बनाता है।

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  • डिलीवरी का माध्यम:
    ऑनलाइन
  • भाषा:
    अंग्रेज़ी
  • शुल्क:
    अनअकादेमी के प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत छात्रों के लिए मुफ्त
  • लक्षित दर्शक:
    छठी से बारहवीं कक्षाओं के विद्यार्थी
  • भौगोलिक क्षेत्र:
    भारत
  • आवृत्ति:
    हर रविवार को सत्रों का सीधा प्रसारण
20 %

किशोर विश्व स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का अनुभव करते हैं

50 %

सभी मानसिक बीमारियां 14 वर्ष की आयु से शुरू होती हैं और अक्सर अनिर्धारित और अनुपचारित होती हैं

10 %

5-16 वर्ष की आयु के बच्चों में नैदानिक ​​रूप से निदान मानसिक समस्या है

छात्रों के लिए

इस कार्यक्रम को तनाव, चिंता और अवसाद के बारे में छात्रों को शिक्षित करने के लिए बनाया गया है ताकि वे समझ सकें कि मानसिक बीमारी उन्हें या उनके साथियों को किस तरह से प्रभावित कर सकती है और ऐसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति वे संवेदनशील बन सकें।

शिक्षकों के लिए

शिक्षकों का कार्यक्रम उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में अवगत कराता है, जिससे वे अपने छात्रों का और अपना समर्थन कर सकें और उन्हें उचित संसाधन मुहैया करा सकें।

माता-पिता के लिए

माता-पिता और अभिभावक किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपने विषय विशेषज्ञों की मदद से हमने एक मुफ्त ऑनलाइन पुस्तिका तैयार की है जिसमें किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के नुस्खे और सलाह है।

अस्वीकारोक्ति: यह पुस्तिका केवल जानकारी देने लिए है। पुस्तिका का वितरण किसी भी प्रकार की व्यक्त या निहित वारंटी के बिना किया जा रहा है। जानकारी की व्याख्या और उपयोग की जिम्मेदारी पाठक की है। किसी भी हालात में इसके उपयोग से उत्पन्न क्षति की देयता टीएलएलएलएफ की नहीं होगी।

2016 में हुई शुरुआत से लेकर अब तक

  • शिक्षकों कों संवेदनशील बनाया गया
    20,000+
    पूरे भारत में
  • छात्रों कों शिक्षित किया
    197,100+
    पूरे भारत में
  • कार्यक्रम कार्यान्वित किया गया
    22
    शहरों में

प्रशंसा पत्र

टी एल एल एल एफ ने पूरे चेन्नई में 7000 से अधिक बच्चों तक पहुँचने में हमारी मदद की है। प्रत्येक सत्र के बाद  हम छात्रों की प्रतिक्रियाओं से अभिभूत हो जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने उनकी भाषा में बात की हो और पहली बार उनकी बात सुनी भी हो। छात्र चिंता या उससे प्रभावित अपने विचारों को व्यक्त करने में संकोच नहीं करते हैं और चुपचाप सहने के बजाय मदद लेने के लिए तैयार होते हैं।

शिक्षकों को भी ऐसा ही लगा। फाउंडेशन का दृष्टिकोण  शिक्षकों को अपने छात्रों को बेहतर ढंग  से समझने में मदद करता है और वे वास्तव में खुद को भी समझ पाए हैं।”

राधिका शशांक, इंकलवीव - चेन्नई

एक स्कूल में सत्र के दौरान  एक छात्र मेरे पास आया और कहा कि “सत्र का संचालन करने और बुकलेट साझा करने के लिए आपका धन्यवाद।  अब मेरे पास मदद लेने के लिए कम से कम हेल्पलाइन नंबर हैं।” उसकी इस बात से मुझे यह एहसास हुआ कि मैं किसी तरह से छात्रों की मदद करने में सक्षम हूं।

लड़कियों के एक सरकारी स्कूल में सत्र के समय  कक्षाओं में बुलिइंग की घटनाओं के  बारे में बात करते हुए  छात्राओं ने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया और यह भी  बताया कि इसका उन पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने खुलकर बताया कि कैसे इन अनुभवों का उन सभी पर भारी प्रभाव पड़ा। उन्होंने यह भी साझा किया कि आमतौर पर कलंक के कारण इन विषयों पर बात नहीं की जाती है।

प्रिया गुप्ता, ट्रेनर - एनरिच

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