ग्रामीण कार्यक्रम

हर सात में से एक भारतीय किसी न किसी प्रकार के मानसिक विकार का सामना करता है। अन्य बीमारियों की ही तरह मानसिक रोग भी भेदभाव नहीं करता है और यह शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में हर उम्र तथा आर्थिक वर्ग में देखा जाता है। भारत सरकार के अनुसार देश की लगभग 70% आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है जहां मदद के लिए जरूरी साधनों को  उन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। इस जरूरत को समझते हुए लिवलवलाफ ग्रामीण समुदायों में रहने वाले संवेदनशील लोगों को सहारा देता है।

कार्यक्रम के बारे में

यह कार्यक्रम मानसिक विकारों का सामना कर रहे लोगों (पीडब्ल्यूएमआई) को मुफ्त मनश्चिकित्सा उपलब्ध कराता है, पीडब्ल्यूएमआई व्यक्तियों और उनकी देखभाल करने वाले लोगों को मुख्य धारा में लौटने में मदद करता है और मानसिक विकारों की रोकथाम और उसके उपचार के टिकाऊ मॉडेल विकसित करता है। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना और मानसिक रोग को स्वाभाविक बनाना भी कार्यक्रम के उद्देश्य हैं।

ध्यान दें: कोविड -19 महामारी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हमने फोन के माध्यम से मनोचिकित्सा और पुनरुत्थान सेवाओं की शुरुआत की है ताकि कार्यक्रम जरूरतमंद तबकों के लिए सहायक बना रहे। इस साल पूरे देश में जारी लॉकडाउन के दौरान हमने पीडब्ल्यूएमआई व्यक्तियों और उनके परिवारजनों का समर्थन फॉलो अप कॉल्स और राशन का समान तथा दवाइयाँ पहुंचाकर की है।

  • वितरण की विधि
    इन-पर्सन और ऑनलाइन
  • भाषा
    स्थानीय क्षेत्रीय भाषा
  • भूगोल
    कर्नाटक और उड़ीसा, भारत

मानसिक विकारों का सामना कर रहे लोगों के लिए

मानसिक विकारों का सामना कर रहे लोगों को मुफ्त मनोचिकित्सा, सहायक समूह की नियमित बैठकें, सरकारी योजनाओं तक पहुंच और पुनरुत्थान प्राप्त होती हैं।

देखभाल करने वालों के लिए

सहायक समूह की नियमित बैठकों को सुगम बनाना, काउंसेलिंग तक पहुंच, मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता शिविर, देखभाल करने की उनकी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करने के लिए प्रशिक्षण, उन्हें अपने स्वास्थ्य की जरूरतों का ध्यान रखने के काबिल बनाना और अपने परिवार का आर्थिक रूप से समर्थन करने में सक्षम बनाना

समुदाय के लिए

समुदाय पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम, जिला और ग्रामीण स्तर के स्थानीय समूहों का गठन एवं पक्षसमर्थन (ऐड्वकसी) के लिए प्रशिक्षण

सरकार का समर्थन

जो भागीदार शामिल हैं:

  • मानसिक रोग चिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) 
  • फ्रंटलाइन सरकारी स्वास्थ्य कर्मी 
  • समुदायों के साथ काम करने वाली संस्थाएँ 
  • जिला स्तरीय सरकारी प्राधिकारी  
  • समुदाय 

2016 में लॉन्च के बाद से

  • 3,297
    प्रत्यक्ष लाभार्थी प्रभावित
  • 13,188
    अप्रत्यक्ष लाभार्थी प्रभावित
  • 13
    कर्नाटक और ओडिशा में शामिल तालुक

प्रशंसा पत्र

मैं कोरापुट से जागु सीसा हूं। पहले मैं पारंपरिक दवाओं का इस्तेमाल करता था  और अपने इलाज के लिए मैंने अंधविश्वास का भी सहारा लिया,  लेकिन उन सब से मुझे कोई सुधार नहीं दिखा। फिर  मुझे जेयपोर के जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर की सलाह के अनुसार  मैंने अपनी दवाएं लेना जारी रखा। मेरे मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति में अब काफी सुधार है और मैं दिन–प्रतिदिन के अपने काम कर लेता हूं। महामारी के दौरान मैं अपनी दवाइयां  नहीं ला पा रहा था,  लेकिन  स्प्रेड  टीम  ने  मेरी  दवाइयां  घर  तक  पहुंचाईं। मैं उनकी इस  मदद के लिए आभारी हूं।

जागु सीसा, कोरापुट - उड़ीसा

केनचम्मा में मानसिक बीमारी के लक्षण दिख रहे थे, जिसमें भूख कम लगना और नींद की गड़बड़ी शामिल थे। उसके परिवार को लगा कि ऐसा बुरी आत्माओं और भगवान से मिली सजा के कारण हो रहा है। वे मंदिरों में गए लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद उसे पड़ोसी जिले के एक वार्ड में भर्ती कराया गया,  जहाँ परिवार ने इलाज,  दवा,  यात्रा आदि पर भारी खर्च किया। मगर चूंकि वे नियमित रूप से दवाईयों का खर्च नहीं उठा पा रहे थे, इसलिए उसके लक्षण दोबारा दिखाई देने लगे।

2019  में  उसने अपने गाँव में एक चिकित्सा शिविर में भाग लिया और उसे मुफ्त इलाज और  दवा मिलने लगी। उसके माता–पिता अब हर महीने पैसे बचा पाते हैं। उसकी हालत अब स्थिर है,  और वह अब कपड़े सिलकर अपने लिए पैसे कमाती है।  वह घरेलू काम भी करती है,  अपने बूढ़े माता–पिता की देखभाल करती है और खेती के काम में अपने भाई की मदद भी करती है।

केनचम्मा की यात्रा

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