#शर्मिंदा नहीं हूं

डिजिटल, प्रिंट, आउटडोर, रेडियो और टीवी के जरिए यह अभियान चलाया गया और मानसिक रोग के वास्तविक जीवन के उत्तरजीवियों को अपनी कहानी बताने और मदद मांगने का प्रोत्साहन मिला।


डिजिटल, प्रिंट, आउटडोर, रेडियो और टीवी के जरिए यह अभियान चलाया गया और मानसिक रोग के वास्तविक जीवन के उत्तरजीवियों को अपनी कहानी बताने और मदद मांगने का प्रोत्साहन मिला। 

परिणाम

  • 50 से अधिक उत्तरजीवियों को आगे बढ़कर अपनी कहानी बताने का प्रोत्साहन मिला 
  • फेसबुक , यूट्यूब और ट्विटर पर 8 करोड़ से ज्यादा इंप्रेशन प्राप्त हुए 

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